भारत निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव कराने का प्रचार-प्रसार रोकने को शिकंजा कसना शुरू कर दिया हो लेकिन कई योजना के माध्यम से घर-घर पहुंचाए गए संदेश को मिटाना आयोग के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। पांच वर्ष में योजना के तहत सरकार ने आमजन तक पहुंच बनाई है।
प्रदेश सरकार की ओर से मेधावी छात्रों को बांटे गए लैपटॉप में तो खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव का चित्र लगा है। एमडीएम योजना के तहत स्कूलों में बांटे गए बर्तनों में मुख्यमंत्री की फोटो लगी है। पिछले दिनों बांटे गए स्कूली बैग के कवर पर सीएम की फोटो लगी है। गरीबों के के लिए शुरू की गई समाजवादी पेंशन की किताब के साथ खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत बांटे गए राशनकार्ड के कवर पर मुख्यमंत्री की सीएम है। परिवहन निगम की ओर से प्रदेश में शुरू की एक्सप्रेस वे बस के बाहर मुख्यमंत्री की फोटो के साथ साइकिल चुनाव चिह्न अंकित है। एंबुलेंस सेवा में भी सत्ताधारी दल का नाम है। क्या प्रशासन के अधिकारी इन योजनाओं में मुख्यमंत्री का प्रचार हटवाने की दिशा में पहल करेंगे।
अंतिम दिन भी बांटे गए बैग
चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद भी सरकारी स्कूलों में बैंग का वितरण गोपनीय ढंग से किया गया, जो शिक्षक बैग नहीं ले गए थे, उन्हें थमाए गए। साथ ही अफसरों ने कहा कि चुपके से बंटवा देना।