निर्भिकता और आत्मबल से संभव है तप: मुनि
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छदामीलाल जैन मंदिर में मुनि विनम्र सागर ने दिए प्रवचन
मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा कि तप देह को दंड देने या प्रताड़ित करने की प्रक्रिया नहीं है। पूर्व में इकट्ठा हुए कचरे को तप की आग में भस्म कर देना चाहिए। तप से हमारे अंदर की सहनशक्तियों को बल मिलता है।
श्री छदामीलाल जैनमंदिर में प्रवचन देते हुए मुनि महाराज ने पर्यूषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर गढ़ा हुआ खजाना, उसे निकालने के लिए मिट्टी को बाहर फेंकने की प्रक्रिया तपस्या है। तप करने के लिए निर्भिकता एवं आत्मबल की जरूरत होती है। कमजोर लोग तप को देखकर आश्चर्य करते हैं। तपस्वी लोग आनंद को प्राप्त करते हैं। हम धर्म की ठंडी आग में तपस्या नहीं कर सके तो विषय भोग की अग्नि में जलकर कष्टों में मरेंगे। उपवास करना, संयम करना तप है। कोई भी चीज गर्मी पाए बिना शुद्ध नहीं होती। इसी तरह आत्मा को तप से शुद्ध किया जा सकता है। अन्य मंदिरों में पर्यूषण पर्व की चर्चा होती रही।
इच्छाओं का विरोध ही तप है: मुकेश शर्मा
पीडी जैन इंटर कालेज में दशलक्षण पर्व पर गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानाचार्य मुकेश शर्मा ने कहा कि इच्छाओं का विरोध ही तप है। मानव इंद्रियों का दास बनकर बैठ गया है। पांचो इंद्रियों के विषय भटकाने वाले हैं। तप द्वारा आत्मा पर पडे़ बुरे कर्म बदल जाते हैं। संचालन शिक्षक कमल जैन ने किया।
नई बस्ती जैन मंदिर में हुई जलधारा
नई बस्ती स्थित जैन मंदिर में जलधारा महोत्सव आयोजित किया। इंद्र स्वरूप बने बच्चे और भक्तों ने जिनाभिषेक किया। इस दौरान भक्ति की धूम रही।