शिकोहाबाद। शब्दम द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ब्रजभूमि वृंदावन स्थित धानुका आश्रम में विशिष्ट शिक्षक सम्मान समारोह एवं शिक्षक मूलत: चरित्र निर्माता है विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
शब्दम द्वारा संस्कृति केतीन शिक्षकों राजाराम मिश्र, दंडी आश्रम वृंदावन, सच्चिदानंद द्विवेदी धर्मसंग विद्यालय वृंदावन व अच्युतलाल भट्ट निवासी सौ फुटा रोड पंचकुला भवन को शाल, नारियल, बैजयंती माला एवं सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता कर रहे उमाशंकर शर्मा को भी शॉल एवं बैजयंती पहनाकर स्वागत किया गया। शुभारंभ वाग्देवी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। शब्दम की अध्यक्ष किरण बजाज के संदेश में कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में पश्चिमी जगत ने जो महान उपलब्धियां प्राप्त कर ली हैं, उनका जवाब नहीं, लेकिन नैतिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में भारत ने जो आदर्श और उदाहरण प्रस्तुत किए, उनकी समता आज भी पश्चिम नहीं कर सका है। इसका सारा श्रेय हमारी शिक्षा प्रणाली को है। पूरब और पश्चिम के शिक्षण का अंतर यही है कि पश्चिम की प्रगति ने हमें दो महायुद्ध दिए और भारतीय शिक्षण ने वह संदेश, जिनसे मनुष्य, मनुष्य बनता है। वसुधैव कुटुम्बकम, सत्यमेव जयते, विश्व का कल्याण, यह सब भारतीय शिक्षा के आदर्श हैं। विद्वान पं. राजाराम मिश्र ने कहा कि शिक्षकों को मौलिक चिंतन चरित्र निर्माण के संबंध में कार्य करना होना चाहिए। वैदिक परंपरा की शिक्षा व्यवस्था ही विश्व समाज की पोषिका तथा मानव का कल्याण करने वाली विद्या है। भौतिक युग में वैदिक शिक्षा ही मार्ग दिखाएगी। हमारा जो भी लक्ष्य है उसकी प्राप्ति में वेद मार्ग के अलावा कोई मार्ग कारगर नहीं। डॉ. अत्युतलाल भट्ट ने कहा कि जो विद्या के लिए, समाज के लिए, मूल्य के लिए समर्पित वही मूलत; शिक्षक है। समाज का कर्तव्य है विद्या को ज्ञान को, महती चेतना को सम्मान प्रदान करें।