यूपी बोर्ड परीक्षाओं में फर्जीवाडे़ की आशंका गहराने लगी है। बोर्ड की लापरवाही की वजह से अभी तक वेबसाइट पर शिक्षकों के परिचय पत्र अपलोड़ नहीं हो सके हैं। परीक्षाओं में चंद दिन बाकी रहने की वजह से विभाग ने स्थानीय स्तर पर ही परिचय पत्र बनाना शुरू कर दिया है।
नकल विहीन परीक्षाएं कराने के लिए शासन ने कडे़ निर्देश जारी किए। फर्जी शिक्षकों पर लगाम कसने के लिए बोर्ड ने परिचय पत्र को ऑनलाइन जारी करने के लिए कहा था। लेकिन बोर्ड ने खुद ही इस प्रक्रिया में हीलाहवाली बरती। बोर्ड की वेबसाइट पर शिक्षकों के परिचय पत्र अपलोड़ ना होने की वजह से स्थानीय स्तर पर पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। स्कूल संचालक जिन शिक्षकों के नाम भेज रहे हैं, उन पर मजबूर होकर विभाग मुहर लगाकर पहचान पत्र जारी कर रहा है। इससे अध्यापकों का विषय तो बदला जाएगा ही। साथ ही फर्जी शिक्षकों के भी परीक्षा में शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अभी तक शिक्षकों के परिचय पत्र वेबसाइट पर अपलोड़ नहीं हुए हैं। इस वजह से विभाग शिक्षकों के परिचय पत्र अपने स्तर से जारी कर रहा है। जैसे ही वेबसाइट पर अपलोड़ होंगे तो विभाग परिचय पत्र वितरण कर देगा।
रवींद्र कुमार, डीआईओएस
कक्ष पर्यवेक्षक पद से हटाए गए सफाई कर्मी
नकल विहीन परीक्षाएं कराने के लिए विभाग ने सफाईकर्मियों को कक्ष पर्यवेक्षक बनाने की जिम्मेदारी दो दिन पूर्व ही सौंपी गई थी। विरोध एवं आपत्तियों के कारण विभाग को अपने फैसले को बदलना पड़ा। डीआईओएस रवींद्र कुमार का कहना है कि सफाई कर्मी अब कक्ष पर्यवेक्षक नहीं होंगे।