फिरोजाबाद। जिले के परिषदीय स्कूलों में डेढ माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म हो गया। आज से स्कूलों में रौनक दिखाई देगी। इसी के साथ सत्र 2023-24 के लिए स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावी रूप से शुरू हो जाएगी। इस बीच अव्यवस्थाएं पहले की ही रहने की आशंका है। विभाग ने ग्रीष्मावकाश में भी स्कूलों की स्थिति सुधारने का प्रयास नहीं किया। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में भी रौनक आज से लौटेगी। प्राइवेट स्कूलों का अवकाश भी रविवार को खत्म हो गया। ऐसे में बच्चों में गजब का उत्साह नजर आया।
जिले के 180 जर्जर स्कूलों को चिह्नित किया गया था। इसमें से 100 से ज्यादा भवन गिरा दिए गए। ऐसे में शेष विद्यालयों के छात्र-छात्राएं जर्जर स्कूलों में पढ़ेंगे। वहीं, 20 से ज्यादा ऐसे विद्यालय हैं, जो विद्यालय भवन नए बनने हैं। पुराने भवन ढहा दिए गए। ऐसे में इन विद्यालयों के बच्चों को बारिश, धूप में फिलहाल खुले में बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ेगा। बारिश के चलते 100 से ज्यादा स्कूलों में पानी भर जाता है, इमारत के गिरने की भी आसार बने रहते हैं। यही हाल इस साल भी रहने वाला है। बीएसए लंबे समय से जल्द समाधान की बात कहते आए हैं।
पिछले कई सालों से जिले के 14 स्कूलों में बिजली नहीं है। हर साल जब इस मुद्दे पर बात होती है विभाग जल्द समाधान की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। लेकिन एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारी आज तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए हैं। लिहाजा सालों से इन स्कूलों में बिना बिजली के होने वाली हर समस्या मौजूद है। -
1252 स्कूलों में नए सत्र में भी जमीन में बैठकर पढ़ेंगे विद्यार्थी
जिले के करीब 1252 स्कूलों में पिछले काफी समय से फर्नीचर नहीं है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को जमीन पर बैठाकर कक्षाएं लगाई जाती हैं। विभाग काफी समय से जनप्रतिनिधियों के जरिए फर्नीचर की व्यवस्था कराने की बात कह चुका है लेकिन अब तक स्कूलों में फर्नीचर नहीं पहुंचा है। हालांकि बीएसए का कहना है फर्नीचर के लिए क्रयादेश जारी हो चुका है।
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नए सत्र में भी रहेगी शिक्षकों की कमी
जिले में करीब सात हजार शिक्षक तैनात हैं। विद्यार्थियों की संख्या 1.80 लाख से अधिक है। ऐसे में मानकों की धज्जियां तो उड़ ही रही हैं, कई स्कूल ऐसे भी हैं जिनमें एक ही शिक्षक तैनात है। कुछ स्कूलों में शिक्षामित्र पर ही पूरे स्कूल की जिम्मेदारी है। यह हाल तब है जब शिक्षामित्रों को शिक्षक की श्रेणी में नहीं आंका जा सकता।
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यूनिफॉर्म के लिए सहायता राशि का हाल इस साल भी बेहाल
साल 2022 में यूनिफॉर्म, जूत मौजे के लिए सहायता राशि के इंतजार में पूरा साल बीत गया था। इसके बाद भी करीब 30 हजार विद्यार्थी इससे वंचित रह गए थे। इस साल भी हालात कुछ ऐसे ही नजर आ रहे हैं। सहायता राशि का पहली किस्त जो अप्रैल के तीसरे सप्ताह में जारी होनी थी, उसे दो माह बीत चुके हैं। कई विद्यार्थियों का अब तक आधार सत्यापन ही पूरा नहीं हो सका है।
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विद्यालय समय से खुलने चाहिए, नियमित निरीक्षण कराएं जाएंगे। पहले दिन से ही शिक्षण कार्य शुरू करा दिया जाए। जो बच्चे स्कूल नहीं आएं, उनके अभिभावकों से संपर्क कर स्कूल भेजने का आग्रह किया जाएगा।
आशीष पांडेय, बीएसए