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हड़ताल : छह हजार मरीज लौटे, 400 ऑपरेशन टले

Sun, 18 Aug 2024 12:53 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म व हत्या के विरोध में शनिवार को पूरा स्वास्थ्य महकमा सड़क पर उतर आया। चिकित्सकों के साथ विभिन्न संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए हत्यारों को फांसी की मांग की। डॉक्टरों की हड़ताल से पूरे जिले में इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। इस दौरान करीब छह हजार मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। वहीं 400 से अधिक ऑपरेशन टल गए। शनिवार को डॉक्टरों की हड़ताल के कारण जिले की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई। रोजाना की तरह मरीज अस्पताल तो पहुंचे, लेकिन उन्हें सिर्फ निराशा हाथ लगी। पर्चा काउंटर बंद होने के कारण मरीज भटकते रहे। निजी डॉक्टरों की ओपीडी बंद होने के कारण मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ उमड़ने लगी। लेकिन चिकित्सक के न बैठने से पर्चा काउंटर सूने पड़े रहे। जिससे मरीजों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। दवा काउंटर पर भी कोई मरीज नजर नहीं आया।
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मेडिकल कॉलेज में पचवान से आईं गीता देवी ने कहा कि मां का एक सप्ताह पहले ऑपरेशन हुआ था। अब डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठे हैं। कबरला से आए विवेक शर्मा को तेज बुखार था, डॉक्टरों के हड़ताल के कारण मेडिकल स्टोर से दवा लेकर वापस जाना पड़ा। वहीं कई गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर दिया गया। आईएमए अध्यक्ष डाॅ. पूनम अग्रवाल के अनुसार प्रतिदिन जिले में 350 से अधिक ऑपरेशन होते हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में 50 ऑपरेशन किए जाते हैं।
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मरीज बोले हम भी चाहते सुरक्षित रहें डॉक्टर
-मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आए फरिहा निवासी ब्रजेश यादव ने बताया कि कोलकाता की घटना बेहद दुखद है। सरकार को इस पर कड़ा निर्णय लेना चाहिए। हम भी चाहते हैं कि डॉक्टर सुरक्षित रहें, लेकिन उपचार बाधित नहीं करना चाहिए। नगला पान सहाय से आए दीनदयाल शर्मा ने बताया कि आंख में समस्या थी, उन्हें वापस जाना पड़ा। लेकिन उन्होंने भी डॉक्टर पर हमले का विरोध जताया। कहा कि हम दूसरे दिन उपचार करवा लेंगे, लेकिन डॉक्टरों को न्याय मिलना चाहिए। कई मरीज प्राइवेट क्लीनिकों के बाहर चिकित्सक आने का इंतजार करते रहे।
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आईएमए के साथ रेजिडेंट, पीएमएस के डाॅक्टरों ने किया बहिष्कार
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि उनके संगठन के 120 डॉक्टर सदस्य हैं। जिन्होंने 24 घंटे के लिए पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार रखा है। वहीं रेजिडेंट व पीएमएस के 200 डॉक्टर कामकाज बंद कर आंदोलन में कूद पड़े। रेजिडेंट डॉक्टर्स ने मेडिकल कॉलेज परिसर में पैदल मार्च निकालकर डॉक्टर के हत्यारों को फांसी दो, वी वांट जस्टिस्ट, सेफ्टी नहीं तो ड्यूटी नहीं के नारे लगाए गए। इधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सभी चिकित्सक फिरोजाबाद क्लब में एकत्रित हुए। यहां बैठक करने के बाद डीएम कार्यालय ज्ञापन देने पहुंचे। चिकित्सकों ने कहा कि दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, मामले की त्वरित सुनवाई कर अधिकतम सजा दिलाई जाए। डॉक्टरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए केंद्रीय कमेटी बनाई जाए। इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे पुलिस प्रशासन की व्यवस्था दी जाए। प्राइवेट ट्रामा सेंटर में मरीजों की हड़ताल रही। यहां डाॅ. निमित गुप्ता, डाॅ. गौरव अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सकों ने विरोध जताया। इस दौरान डाॅ. एसपीएस चौहान, डाॅ. गौरव अग्रवाल, डाॅ. विवेक अग्रवाल, डाॅ. दीपक गुप्ता, डाॅ. नीरज गुप्ता आदि मौजूद रहे। लहरी हॉस्पीटल के प्रबंधक डाॅ. एसपी लहरी ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए पूरे दिन ओपीडी बंद रखी। लायंस क्लब के अनिल अग्रवाल ने भी इस घटना का विरोध जताया। आईएमए के साथ ज्ञापन सौंपा।


शाम को निकाला कैंडल मार्च
मेडिकल कॉलेज परिसर में इंडियन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक और रेजिडेंट चिकित्सक संयुक्त रूप से एकत्रित हुए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज परिसर में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। चिकित्सकों ने कहा कि न्याय नहीं मिला तो इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
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