फिरोजाबाद-शिकोहाबाद। मुंसिफी वापस लाओ संघर्ष समिति की एक बैठक सोमवार को तहसील प्रांगण में हुई। जिसमें सभी अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। कहा कि जब तक मुंसिफी शिकोहाबाद में वापस नहीं आएगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में मुंसिफी कोर्ट सन 1852 में शिकोहाबाद में स्थापित हुआ था। जिसमें चार अदालतें अपर मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज प्रथम, अतिरिक्त सिविल जज व द्वितीय अतिरिक्त सिविल जज संचालित होती थीं। तत्कालीन समय से सिविल बार एसोसियेशन अपर जिला जज कोर्ट की मांग करती आ रही थी। मांग पूरी होने का आश्वासन भी मिल चुका था। इसी बीच मुंसिफी कोर्ट की इमारत को कंडम घोषित कर दिया।
समिति अध्यक्ष वेद प्रकाश यादव ने बताया कि 2014 में तहसील के उद्घाटन के समय प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने वकीलों के मध्य खुले मंच से मुंसिफी कोर्ट शिकोहाबाद में स्थापित कराने का आश्वासन दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुंसिफी वापसी के लिए पत्राचार भी किया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
अधिवक्ताओं ने मुंसिफी बापस लाने के लिए मुख्य न्यायाधीश प्रयागराज व कानून मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी देवेंद्र पाल सिंह को सौंपा। इस अवसर पर ब्रजेश चंद्र यादव, कमल सिंह यादव, अशोक यादव, वेदप्रकाश यादव, धीरेंद्र सिंह, कृष्ण औतार यादव, अनिल शर्मा, दिनेश सिंह, नरेश बाबू, निश्चल श्रीवास्तव, प्रशांत बघेल, वीरेंद्र सिंह, अवनीश कुमार आदि मौजूद रहे।