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बंद करो उद्योग विभाग, गरीबों को बांट दो अनुदान

Tue, 14 Feb 2017 08:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
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अपर आयुक्त उद्योग कानपुर के समक्ष सुहागनगरी के उद्यमियों का गुस्सा फूट पड़ा।
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अपर आयुक्त उद्योग कानपुर के समक्ष सुहागनगरी के उद्यमियों का गुस्सा फूट पड़ा। उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली से आक्रोशित उद्यमी बोले कि उद्योग विभाग को बंद किया जाए। विभाग से सरकार से मिलने वाले अनुदान को गरीबों को बांट दो।
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स्टेशन रोड स्थित जिला उद्योग केंद्र में सोमवार को अपर आयुक्त उद्योग कानपुर विनय कुमार श्रीवास्तव उद्यमियों से वार्ता करने के लिए पहुंचे थे लेकिन विभाग द्वारा औद्योगिक संगठनों को ही वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया। अपर आयुक्त के आने की भनक जब उद्यमियों को लगी तो उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर वह गुस्से में आ गए। बिना बुलावे के ही कई उद्यमी विभाग जा पहुंचे और अफसरों को खरी-खोटी सुनाई।
यूपीजीएमएस के डायरेक्टर राजकुमार मित्तल ने कहा कि आखिर यह उद्योग विभाग कार्यालय क्यों खोला गया है। यह उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए खुला है या फिर बंद कराने को। विभाग द्वारा अवैध वसूली के लिए आएदिन उद्यमियों को उल्टे-सीधे नोटिस भेज दिए जाते हैं। नोटिस भेजने से पूर्व सच्चाई भी पता नहीं की जाती है। आखिर ऐसे विभाग की क्या जरूरत है। उद्योग विभाग को बंद कर दिए जाए। सरकार से विभाग को जो अनुदान मिलता है, उसे गरीबों में बंटवा दिया जाए। कार्यालय में गहमा-गहमी का माहौल बन गया। अपर आयुक्त ने बमुश्किल स्थिति को संभाला। इस दौरान उद्योगपति धमेंद्र मोहन गुप्ता, हेमंत अग्रवाल, संजय अग्रवाल आदि रहे।
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मुरादाबाद को सीएफसी प्रोजेक्ट देने का भी विरोध
कॉमन फेसेलिटी सेंटर (सीएफसी) प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिला उद्योग केंद्र द्वारा सात इकाइयों ने आवेदन पत्र निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो भेजे थे। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो द्वारा आवेदकों की बात सुने ही दो प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी थी, जिसमें एक गोयल ग्लास वेयर प्रा.लि. तथा दूसरा प्रोजेक्ट मुरादाबाद की इंडो नोवल्टी प्रा. लि. के नाम स्वीकृत हुआ। अपर आयुक्त उद्योग के समक्ष हेमंत अग्रवाल बल्लू, धर्मेंद्र मोहन गुप्ता ने विरोध करते हुए कहा कि सीएफसी प्रोजेक्ट ऐसी इकाई को दे दिया, जो शहर की नहीं है। इसके अलावा उक्त इकाई के पास गैस भी नहीं है, जबकि हमारे पास इकाई लगाने का पर्याप्त गैस भी है। यह हमारे साथ पूरा अन्य है, हमें कम से कम अपनी बात रखने का मौका तो मिलना ही चाहिए थे।
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