जिले में खेल प्रतिभाएं उभर नहीं पा रही हैं। क्याेंकि खेल निदेशालय की ओर से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। दाऊदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम तो सिर्फ नाम मात्र के लिए है। सुविधाओं की स्थिति बिल्कुल शून्य है। मानव संसाधनों की कमी से लेकर फील्ड के रखरखाव तक अनदेखी नजर आती है। स्टेडियम में सुविधाएं बढ़ाने के लिए की गई घोषणाएं चुनावी एजेंडा बन रह गईं।
251 मीटर लंबाई और 190 मीटर चौड़ाई के क्षेत्रफल में बने जिले के एकमात्र स्टेडियम में शासन से कोच ही नहीं तैनात किए हैं। इसलिए इस बार की गर्मियों की छुट्टियों में कैंप लगने की भी उम्मीद नहीं है। ऊबड़-खाबड़ स्थिति में पडे़ मैदान पर खेलना तो दूर दौड़ने में भी दिक्कत आती है। स्टेडियम से सटे गांवों के युवा ही स्टेडियम के मैदान पर पहुंचते हैं। शासन एवं प्रशासन की ओर से खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सुविधाएं देने पर ध्यान नहीं दिया है।
इस बार तो कैंप भी नहीं लगे
इस साल शासन की ओर से कोई कोच तैनात नहीं किया है। जबकि पिछले वर्ष में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान कैंप में क्रिकेट, जूड़ो, हाकी, जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। लेकिन वर्तमान में क्रीड़ाधिकारी राजकुमार ही खुद प्रशिक्षण देते हैं।
महीनों से अटका टर्फ विकेट का कार्य
स्टेडियम में सांसद निधि से बनने वाले टर्फ विकेट का कार्य महीनों से अटका हुआ है। मैदान में मिट्टी पड़ी है, लेकिन टर्फ विकेट का कार्य शुरू होता नहीं दिखता। बताया गया है कि राजकीय निर्माण निगम के ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरतने पर काली सूची में डाल दिया गया है। दूसरे ठेकेदार को कार्य दिया है तो तीन महीने में कार्य पूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुलदीप कुमार ने कहा कि हम यहां प्रतिदिन फुटबाल खेलने आते हैं। पहले गोल लगे थे, वो भी हटा दिए गए हैं। कोच भी नहीं है।
आदित्य ने कहा कि यहां खेल का कोई इंतजाम नहीं है। मैदान पर घास तक नहीं है। दौड़ भी नहीं सकते। खेलना मुश्किल हो जाता है।
फील्ड को दुरुस्त कराया जा रहा है। मैदान में मिट्टी डलवाई गई है, जिसमें घास उगेगी। मैदान भी आकर्षक लगेगा। समर कैंप के लिए शासन ने कोई कोच नहीं भेजे हैं। उम्मीद है कि अगले माह आएंगे।
राजकुमार, जिला क्रीड़ाधिकारी