जलकल विभाग द्वारा नलकूपों के मेंटिनेंस के नाम छह करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए। इस धनराशि का कोई हिसाब भी नहीं है। डीएम द्वारा गठित की गई कमेटी की जांच में कई अधिकारियों की गर्दन फंसती दिख रही है।
नगर निगम में घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पूर्व में सफाई कर्मी तैनात करने के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ था। इस मामले में पूर्व चेयरमैन सहित कई अफसरों की गर्दनें फंसी हुई है। जलकल विभाग में भी करोड़ों के घोटाले की जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई। हालांकि यह फाइलों में दब गई। अब जलकल विभाग में नए घोटाले की चर्चा है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में नलकूपों के मेंटिनेंस के नाम पर छह करोड़ की धनराशि खर्च कर दी गई। इसमें खास बात यह है कि धनराशि कहां खर्च हुई इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। डीएम विजय किरन आनंद ने करोड़ों के घोटाले की आशंका पर जांच बैठा दी है। डीएम ने जांच कमेटी में सिटी मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज, बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी को एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जल्द ही जलकल विभाग से जुड़े मामले की जांच की जाएगी। इसके लिए लेखा विभाग के रिकार्ड का मिलान किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि जांच में कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है।