स्वास्थ्य विभाग में तमाम योजनाएं बनीं, मगर आधी अधूरी शासन की प्लानिंग के कारण जनता को कोई लाभ नहीं मिल सका है। शवों को घरों तक पहुंचाने के लिए शव वाहन तो आ गए। मगर उन्हें चलाएगा कौन? इसका अभी तक पता स्वास्थ्य महकमे को नहीं लग सका है। कई महीनों से शव वाहन जिला अस्पताल में धूल फांक रहा है।
अक्सर कई मरीजों की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है। परिवारीजन गरीब होने के कारण शव को प्राइवेट एंबुलेंस से घर ले जाने में असमर्थ होते हैं। शवों को घरों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक जिले को करीब तीन माह पूर्व एक शव वाहन दिया गया। मगर इसे चलाने के लिए ड्राइवर भेजा है। ना इसके चलने के लिए ईधन का इंतजाम नहीं किया है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग को कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है कि आखिर यह सुविधा निशुल्क होगी या फिर इसका कोई शुल्क लिया जाएगा। आधी अधूरी तैयारी के साथ आए शव वाहनों का जनता लाभ नहीं ले पा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
शव वाहन को आए करीब तीन माह हो गए हैं। कोई ड्राइवर ही नहीं शासन ने नियुक्त किया है। जबकि यहां तो पहले से ही ड्राइवर की कमी चली आ रही है। शव वाहन के संबंध में कोई गाइडलाइन हमें नहीं मिली है।
- अजय शुक्ला, सीएमएस, जिला अस्पताल