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कोविड का असर- जिले में सुस्त हो गई स्वनिधि वितरण की कवायद

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फिरोजाबाद। शहरी क्षेत्र के पथ विक्रेताओं को आजीविका सुचारु रखने को संचालित पीएम स्वनिधि योजना की रफ्तार जिले में सुस्त हो गई है। कोविड संक्रमण तेज हो जाने कारण स्वनिधि आवेदकों का सत्यापन कार्य ठप है। वहीं दूसरी ओर बैंक में चल रहे वार्षिक ऑडिट कार्य के चलते लगभग 11454 आवेदन जिले की बैँक शाखाओं में धूल फांक रहे हैं।
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पथ विक्रेताओं की आजीविका बढ़ाने को संचालित पीएम स्ट्रीट वेडर्स योजना जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है। 31 मार्च तक चले विशेष अभियान के बाद स्वनिधि वितरण का कार्य प्रभावित है। शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान जिले को निर्धारित लक्ष्य 36727 निर्धारित किया था। इसमें गत 31 मार्च तक सभी आठ निकाय क्षेत्र में कुल 18505 पथ विक्रेताओं को स्वनिधि दिलाने का लक्ष्य दिया गया है। अभी तक नवगठित नगर पंचायत मक्खनपुर सहित सभी आठ नगर निकायों में लगभग 9819 पथ विक्रेताओं को ही स्वनिधि योजना जरिए दस-दस हजार रुपये का ऋण दिलाया गया है।
सत्यापन को मौके पर नहीं मिल रहे पथ विक्रेता
कोविड संक्रमण बढ़ोत्तरी होने से पथ विक्रेताओं को लॉकडाउन लगने का भय सताने लगा है। शहरी क्षेत्र में रेहड़ी, ठेल व खोखा रख कर आजीविका कमा रहे पथ विक्रेता कामकाज समेट कर पैत्रक गांव की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं में से कई स्वनिधि वितरण से पूर्व जरूरी सत्यापन के दौरान टीमों को मौके पर नहीं मिल रहे।
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बैंकों में वार्षिक ऑडिट के कारण स्वनिधि वितरण ठप
हाल ही समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के चलते अधिकांश बैंक शाखाओं में वार्षिक लेखाबंदी का काम चल रहा है। इसकारण बैंकर्स की ओर से स्वनिधि वितरण के काम में रुचि नहीं ली जा रही है। ताजा स्थिति के अनुसार पात्रता व स्वीकृत श्रेणी के करीब 11454 स्वनिधि आवेदन बैंक शाखाओं में धूल फांक रहे हैं।
पीएम स्वनिधि खाका
कुल लक्ष्य कुल आवेदनों की संख्या- स्वीकृत आवेदन-कुल ऋण वितरण
36727 16688 11454 9819
प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर जिला
स्वनिधि वितरण के मामले में शासन की ओर से कराई गई रैकिंग में फिरोजाबाद जिला सबसे निचले पायदान पर है। निकायों व बैंक शाखाओं ने इस योजना में खास रुचि नहीं ली। हालांकि नगर निगम का प्रदर्शन अन्य निकायों की अपेक्षा ठीक रहा।
निकायों की ओर से स्वीकृति व सत्यापन के उपरांत बैक शाखाओं में आवेदन भेजे गए थे। उक्त आवेदनों के सापेक्ष बैंकर्स की ओर से पथ विक्रेताओं को स्वनिधि जारी नहीं हो पा रही है। इसका प्रमुख कारण कई पथ विक्रेता सत्यापन के लिए मौके पर नहीं मिल रहे। अथवा बैंकर्स का फोन नहीं उठा रहे।
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सुभाषवीर सिंह राजपूत परियोजना निदेशक डूडा
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