फिरोजाबाद। नया सत्र शुरू होते ही एक बार फिर से स्कूल संचालकों की मोटी कमाई शुरू हो गई है। विद्यालय संचालक प्रवेश के साथ साथ किताबों के खरीदने को लेकर मनमानी कर रहे हैं। मोटे कमीशन के चक्कर में विद्यालय चिह्नित दुकानों से ही पाठ्य-पुस्तकें खरीदने को विवश कर रहे हैं। प्राइमरी कक्षाओं की किताबें जहां तीन से चार हजार रुपये में आ रही हैं, वहीं सीनियर कक्षाओं की किताबों के लिए छह से सात हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। जिले में 57 सीबीएसई, दो आईसीएससीई तथा करीब 1800 निजी विद्यालय संचालित हैं। सभी स्कूलों के अपने-अपने दुकानदार हैं, जिनके प्रतिष्ठानों पर ही संबंधित स्कूलों की पुस्तकें मिल रही हैं। दाम मनमाने हैं, लेकिन अभिभावकों की मजबूरी है। इतना ही नहीं हर जगह उन स्कूलों की किताबें नहीं हैं। स्कूलों से अभिभावकों को पुस्तकों की सूची अथवा केवल दुकान का नाम ही बता दिया जाता है कि पुस्तकें कहां मिलेगी। अभिभावक मजबूर हैं। बच्चे को परेशान किए जाने के डर से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं।
वर्जन
छात्रों और अभिभावकों पर किसी एक दुकान से पाठ्य पुस्तकें खरीदने का दबाव नहीं डाला जा सकता है। कोई भी अभिभावक शिकायत करेगा तो मामले मेंं नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निशा आस्थाना, जिला विद्यालय निरीक्षक
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केवल नाम बताओ किताबें पाओ
-बृहस्पतिवार को रामलीला रोड स्थित एक किताब की दुकान पर किताब खरीदने पहुंचे विदित जैन ने बताया कि उन्होंने बेटी का एडमिशन निजी स्कूल में कराया है। जब किताब लेने की बात कही गई तो दुकान का नाम बता दिया कि जाओ वहीं पर मिल जाएगा। इसी तरह उसी दुकान पर मौजूद रीना तिवारी ने बताया कि उनका बेटा एक निजी स्कूल में पढ़ता है, स्कूल की तरफ से कोई लिस्ट नहीं दी गई है, केवल स्कूल का नाम बताने पर ही किताबें दुकान पर दी जा रही हैं।
कक्षाकिताबों के दाम
नर्सरी से यूकेजी तक 3000 से 3500
कक्षा एक से पांच तक4000 से 6000
कक्षा छह से 12 तक6000 से 8000