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परचून की उधारी में चला गया बच्चों की ड्रेस का पैसा

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फिरोजाबाद। सरकारी स्कूलों के बच्चे भी स्मार्ट दिखें और अनुशासन में रहें इस लिए सरकार डीबीटी के तहत बच्चों की ड्रेस और बैग आदि के लिए अभिभावकों के खाते में रुपये भेजती है। अफसोस, सरकारी कवायद यहीं दम तोड़ रही है। कई अभिभावक डीबीटी की धनराशि को अपनी जरूरतों पर खर्च कर रहे हैं। शिक्षक बच्चों को ड्रेस पहनकर आने के लिए कह रहे हैं तो बच्चे बता रहे हैं कि पापा ने परचून की उधारी चुका दी। वहीं किसी के खाते से लोन की धनराशि कट गई। ऐसे में बच्चे स्कूलों में रंग-बिरंगी ड्रेस में नजर आ रहे हैं।
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सरकार की ओर से प्राइमरी स्कूल में बच्चों की ड्रेस, जूते-मोजे और बैग आदि के लिए 12 सौ रुपये दिए जाते हैं। यह रकम अभिभावकों के खाते में भेजी जा रही है। इसके बाद भी जिले के 1865 प्राथमिक विद्यालयों में तीस फीसदी से अधिक बच्चे बिना ड्रेस के स्कूल पहुंच रहे हैं। काफी संख्या में बच्चे बीते साल खरीदी ड्रेस पहनकर ही पहुंच रहे हैं। वर्तमान सत्र में बमुश्किल 10 फीसदी बच्चे ही इस वर्ष खरीदी गई ड्रेस पहनकर पहुंच रहे हैं।
प्राइमरी स्टेशन रोड कन्या में 25 बच्चे ड्रेस में नहीं
इस विद्यालय में 60 बच्चे हैं। इसमें 25 बच्चे बिना ड्रेस के ही नजर आए। कक्षा में मौजूद शिक्षामित्र नीरज कुमार ने बताया कि अधिकांश बच्चे बीते वर्ष की ही ड्रेस पहनकर आ रहे हैं। ड्रेस बनवाने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाता है, लेकिन कुछ अभिभावक अनसुनी कर रहे हैं।
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कोटला बालक में 49 में 17 के पास ड्रेस नहीं
प्राइमरी कोटला बालक विद्यालय में 49 बच्चों में से 17 बच्चे बिना ड्रेस के नजर आए। प्रधानाध्याक मोहम्मद जब्बार ने बताया कि जब बच्चों पर ड्रेस पहनकर आने को दबाव बनाते हैं तो बच्चे कहते हैं कि पापा ने ड्रेस का पैसा खर्च कर लिया। कई अभिभावकों का लोन चल रहा है, जिसमें ड्रेस की आई धनराशि कट गई है। हम अभिभावकों को जागरूक करेंगे।
बीते साल दो की बजाय एक ही खरीदी ड्रेस
बीते साल भी डीबीटी की धनराशि से 30 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों के लिए ड्रेस खरीदी ही नहीं थी। 20 फीसीदी ऐसे अभिभावक थे, जिनमें दो ड्रेस की धनराशि आई, उसमें एक ही ड्रेस खरीदी।
जूते मोजे और बस्ता भी गायब
ड्रेस के अलावा जूते, मोजे और बस्ते भी बच्चों को नहीं दिलाए जा रहे हैं। टोकने पर भी कोई सुधार नहीं होता। नतीजतन बच्चे चप्पलों में ही स्कूल पहुंचते हैं। ज्यादा टोकने पर बच्चे स्कूल नहीं आते, यह भी शिक्षकों के लिए समस्या है।
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ड्रेस के लिए धनराशि सीधे अभिभावकों के खाते में डाली जा रही है। हमने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह अभिभावकों को जागरूक करें कि शासन से जो धनराशि आई है, वह उसी मद में प्रयोग करें।
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- डा. अंजली अग्रवाल, बीएसए
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