टीटीएसपी स्थापना के नाम पर जलनिगम द्वारा हर स्तर पर गोलमाल किया गया है। जिला प्रशासन के लाख के प्रयास अभी तक कई टीटीएसपी ढूंढे नहीं मिल रही हैं। वहीं लाखों रुपये के भुगतान के बाद भी कई टीटीएसपी पर जेनरेटर नहीं लगे है। महज कागजों में जेनरेटर लगे दर्शाए गए हैं।
जनपद में व्याप्त पेयजल संकट के निदान के लिए बसपा शासनकाल में टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) स्थापित कराने के लिए जल निगम को किश्तों में 65 करोड़ों रुपये की धनराशि जारी की गई थी। जल निगम में तैनात रहे अफसरों और ठेकेदारों ने इसमें करोड़ों रुपये का घोटाला कर दिया। अफसरों ने कागजों में ही टीटीएसपी दर्शा कर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया। मामले की जानकारी होने पर जांच सीडीओ को सौंपी गई। सीडीओ ने स्वयं जलनिगम जाकर टीटीएसपी से संबंधित रिकार्ड खंगाले। अफसरों, ठेकेदारों को तलब किया। जिला प्रशासन द्वारा कई विभागों से सर्वे कराया गया, जिसमें अभी तक कई टीटीएसपी ढूंढे नहीं मिली हैं। इधर, जलनिगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो जलनिगम द्वारा टीटीएसपी स्थापित कराने के लिए ठेकेदार को तीन लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई। जलनिगम ने स्वयं चार लाख की लागत से टीटीएसपी पर जेनरेटर, टंकी, फर्नीचर के नाम पर करीब चार-चार लाख भुगतान कराया। हालांकि अभी भी करीब डेढ़ दर्जन टीटीएसपी ऐसे हैं, जहां आजतक जेनरेटर ही स्थापित नहीं हुए। मात्र कागजों में दर्शा कर लाखों का भुगतान करा लिया। इस मामले जलनिगम के अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।