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गोमांस की बिक्री के विरोध में संत समाज मुखर

Sun, 25 Oct 2015 11:29 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
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निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी चित प्रकाशानंद महाराज ने कहा कि गोमांस की बिक्री एवं सेवन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि देश के 90 करोड़ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करना गलत है। हम दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं तो उन्हें हमारी भावनाओं का ख्याल रखना होगा। उन्होंने सम्मान लौटाने वाले सभी साहित्यकारों को कम्युनिस्ट विचारधारा वाला बताया।
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हुंडावाला बाग स्थित अनूप गुप्ता के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर संतों की चुप्पी के सवाल पर कहा कि संत उग्र आंदोलन नहीं करते। केंद्र सरकार को मंदिर की चिंता है। अखाड़े और संत समय-समय पर अपनी बात पहुंचाते हैं। गोमांस को लेकर देश में गरमाई राजनीति के सवाल पर महामंडलेश्वर ने कहा कि यह गलत है। वह गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए पहल करेंगे। उन्होंने कहा कि गायों को रखने के लिए गोशाला बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के प्रयोग से धरती बंजर होती जा रही है। गौ मूत्र एवं गोबर से भूमि को शक्ति वापस मिलेगी। उन्होंने साहित्यकारों के सम्मानपत्र के वापसी के सवाल पर कहा कि दंगा फसाद तो हर सरकार में हुए लेकिन कम्युनिस्ट विचारधारा वाले साहित्यकार ही पुरस्कार लौटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन में 24 अप्रैल से एक मई तक सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। महाकुंभ में शक्ति साधना सेवा समिति के तत्वावधान में विशाल कैंप का आयोजन किया जाएगा। कुंभ में देश के विभिन्न हिस्सों के संत और महापुरुषों के साथ विदेशों से भी लोग महाकुंभ देखने आएंगे। पर्यावरण संरक्षण व गौ संरक्षण के कार्य भी संगठन की ओर से किए जाते हैं। इस दौरान रामशंकर गुप्ता, अजय गुप्ता, शिवकुमार गर्ग, रमेशचंद्र, मदनलाल शर्मा, कन्हैया गुप्ता, प्रदीप अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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