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150 रुपये में बुझती प्यास, अधूरा गांव का विकास

Wed, 06 May 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फीरोजाबाद
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लोहिया गांव जमालपुर में विकास का पहिया तो घूमा लेकिन सड़क और पानी का संकट खत्म नहीं हो सका। 150  रुपया प्रति माह देकर पानी खरीदना पड़ता है। गांव में हैंडपंपों की संख्या तो पांच दर्जन से अधिक लेकिन काम नहीं करते। लोहिया गांव का ठप्पा लगने के बावजूद भी गांव विकास से दूर है।
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सपा सरकार की लोहिया गांव समग्र विकास योजना 2012-13 में सदर ब्लाक के जमालपुर गांव का चयन हुआ था। दो हजार से अधिक आबादी वाला बघेल समाज बाहुल्य इस गांव में विकास का पहिया घूमा। गलियों में कहीं सीसी तो कहीं खड़ंजा का कार्य कराया गया। बाद में जो गलियां कच्ची रह गईं उन्हें बनवाने की जहमत नहीं उठाई गई। पानी का संकट यहां की मुख्य समस्या है। ग्रामीणों की मानें तो हैंडपंप खराब होने के कारण पानी खरीदने को विवश हैं। प्रधान अतर सिंह बघेल के घर के करीब से ही जाने वाली किशनलाल वाली गली कच्ची है। तलैया की ओर जाने वाले मार्ग पर मिट्टी डलवाई गई वह बारिश में दल-दल में तब्दील हो जाती है।


64 हैंडपंपों में से अधिकांश खराब
लोहिया गांव जमालपुर में पानी की सुविधा को हैंडपंप तो 64 लगाए गए लेकिन अधिकांश खराब हैं। प्रधान के घर के करीब एक हैंडपंप में सबमर्सिबल पंप को लगाया है। राम विलास, मझपत सिंह एवं प्रवीन कुमार के घर के निकट लगे तीनों हैंडपंप पानी नहीं देते। रेखा देवी की मानें तो पानी विजय किशोर के घर से 150 रुपया प्रतिमाह देकर मोल खरीदते हैं।
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खंभे नहीं लगे तो सोलर स्ट्रीट लाइट कैसे जलें
लोहिया गांव जमालपुर में 17 लोहिया आवास निर्माण कराए हैं। इन आवासों के लिए मात्र 1.30 लाख रुपया मिलने के कारण अधिकांश लाभार्थियों को घर से पैसे भी लगाने पड़े। सोलर लाइटें तो लगाईं, लेकिन खंभे लगाना भूल गए। लाभार्थी रेनू देवी पत्नी अनूप कुमार वाल्मीकि के लोहिया आवास की यही स्थिति मिली प्रधान पुत्र धर्मेंद्र ने बताया कि खंभों को जमाया नहीं इसे सूर्य की रोशनी के अनुरूप बदलते हैं।


स्वच्छ भारत मिशन की दिखी झलक
लोहिया गांव जमालपुर में स्वच्छ भारत मिशन की झलक दिखी। गांव में बने 326 शौचालयों का उपयोग होता दिखाई दिया। ग्रामीण बोले कि यह प्रशासन एवं शासन की अच्छी पहल है। शौचालयों के बाहर लाभार्थी का नाम भी अंकित था।


ग्रामीण बोले, पानी है परेशानी
- रेखा सिंह बघेल ने कहा हैंडपंप खराब होने के कारण यहां पानी का संकट है। 150 रुपया प्रतिमाह देकर पानी को मोल खरीदते हैं। सफाई नहीं होती। मच्छरों के ही कारण रात्रि को चैन की नींद नहीं सो पाते।

- रामविलास कहते हैं कि कुछ गलियों में खड़ंजा है कुछ में सीसी करा दी। पानी का संकट है। गलियां साफ नहीं होतीं गर्मी के मौसम में पेयजल की व्यवस्था सुधारें तो ठीक है।

गांव में विकास कार्य कराने को भरपूर मेहनत की। हर वर्ग का ख्याल रखा। 326 शौचालय बनवाए, 17 लोहिया आवास तथा एक समूह का गठन किया। सीसी निर्माण को मिले 30 लाख रुपये खर्च किए। और विकास कराएंगे।
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अतर सिंह बघेल, ग्राम प्रधान
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