फिरोजाबाद। अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर में लोग अपने-अपने तरीके से इस दिन को उत्सव की तरह मनाने की तैयारी में थे। तमाम गर्भवती महिलाएं विनती कर रही थीं कि 22 जनवरी को उनके घर नन्हा मेहमान आए। यह खुशी उर्दू नगर निवासी फरजाना के घर पहुंची तो अपने नवजात शिशु का नाम रहीम के बजाय रामरहीम रख दिया। बेटियां पैदा होने पर उनके नाम सीता रखे गए। इसी तरह सुहागनगरी के मेडिकल कॉलेज सहित प्राइवेट अस्पतालों में 65 राम और 23 सीता पैदा हुईं। अस्पतालों में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।फरहाना के दो बेटियों के बाद 22 जनवरी को एक बेटे का जन्म हुआ। परिजन ने उसका नाम रहीम सोचा था, लेकिन फरहाना ने बताया कि राम मंदिर प्रतिष्ठा के दिन बच्चा जन्मा है तो उसका नाम रामरहीम रख दिया। आसफाबाद निवासी सरिता की पहले बेटी की मृत्यु हो गई थी। 22 जनवरी को उन्होंने दूसरी बेटी को जन्म दिया तो उसका नाम सीता रखा गया। इसी तरह अस्पताल में जन्मे हर बालक का नाम राम और बालिका का नाम सीता रखा गया। साथ ही रामधुन भी नवजात शिशुओं को सुनाई।
प्राइवेट अस्पताल में एक मुस्लिम महिला ने भी डिलीवरी के लिए ऐतिहासिक दिन का चुना। बेटा जन्म होने पर राम का नाम रखा। सभी शिशुओं के परिजन ने कहा कि उनके के लिए तो मानो आज का दिन जीवन का सबसे बड़ा दिन बन गया है। एक तरफ अयोध्या में श्रीराम आए हैं, तो वहीं उनके घर में भी भगवान के उपहार के रूप में बच्चे का जन्म हुआ है। इन बच्चों को जन्म देने वाली माताओं के साथ परिजन भी काफी खुश हैं।
डॉक्टर ने दिए उपहार, बांटा प्रसाद
चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ भी इस दिन को आस्था भरी नजर से देखता रहा। सौ शैया अस्पताल में जन्मे बच्चों को राम और सीता का स्वरूप मानकर उन्हें उपहार दिए। प्रसाद का वितरण भी किया। यही हाल प्राइवेट अस्पतालों में रहा।