भगवान की भक्ति से जीवन में प्रेम भर जाता है और जिसने इस प्रेम को अपना लिया, वहां कभी कलह नहीं होती है। प्रेम और ज्ञान के बिना मनुष्य पशु के समान है। यह विचार हाइवे रोड स्थित तेल मिल परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य पदमचंद्र उपाध्याय ने कथा के दौरान प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने उद्धव-गोपी संवाद सुनाते हुए कहा कि उद्धव ने जब गोपियों को योग मार्ग अपनाने को कहा गोपियों ने उद्धव से कहा कि आप वचन रूपी पत्थरों से हृदय पर प्रहार मत करो। श्रीकृष्ण तो मन में बसे हुए हैं और उन्हें मन से कोई अलग नहीं कर सकता। इस पर गोपियों ने कहा कि आराध्य तो केवल कृष्ण ही हैं कोई दूसरा उनके हृदय में स्थान नहीं ले सकता। आचार्य ने प्रवचन करते हुए कहा कि काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार का त्याग कर जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए। इस दौरान परीक्षित रतन सिंह बघेल, रामबेटी, यज्ञपति चोब सिंह, सोन देवी, रामवीर सिंह, कमलेश, श्याम सिंह, हरवीर सिंह, प्रदीप सिंह, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।