निराजल और निराहार रहकर अखंड सुहाग की कामना का पर्व करवा चौथ आज है। करवाचौथ की रात बेताब निगाहें आसमान में आंख-मिचोली करते चंचल चांद की राह तकेंगी। करव चतुर्थी यानि करवाचौथ पर इस बार सुहागिनों ने विशेष तैयारियां की हैं। फीरोजाबाद में चांद का दीदार 08.21 बजे के आसपास होगा। इसके साथ ही विवाहित महिलाएं विधिवत पूजा अर्चना कर व्रत का पारण करेंगी।
शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थसिद्ध योग में सौभाग्य का महापर्व पड़ेगा। चौथ के दिन शंकर पार्वती सहित कार्तिकेय और गणेश की पूजा की जाती है और चंद्रदेव को अर्घ अर्पित किया जाता है। करवाचौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन और पूजा के बाद पूरा होता है। ऋग्वेद में सौभाग्य के लिए सोलह श्रृंगारों का वर्णन है। मान्यता है कि सोलह श्रृंगार घर में सुख, समृद्धि लाने के लिए किए जाते हैं। महिलाएं हाथों में मेहंदी रचाती हैं, 16 श्रृंगार, पूजा कर व्रत का पारण करती हैं।
करवा चौथ पर रखें शगुन और अपशगुन का ध्यान
पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाने वाला करवा चौथ का व्रत हर विवाहित स्त्री के जीवन में एक नई उमंग लाता है। महिलाएं सच्चे दिल से सभी शगुनों वाले काम करती हैं लेकिन अशुभ माना जाता है उनसे भी बचने की कोशिश करें।
- संभव हो तो लाल रंग के कपड़े ही पहनें क्योंकि लाल रंग गर्मजोशी और मनोबल बढ़ाता है साथ ही लाल रंग प्यार, रोमांस और पैशन का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं एवं सबके आकर्षण का केंद्र बिंदु बनती हैं। नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े न पहनें क्योंकि ये अशुभता के प्रतीक हैं। ये रंग ओजस्विता कम करता है, अवसादकारक एवं उत्पीड़क बोझ देने वाले होते हैं।
- करवा चौथ की पूजा से पहले और बाद में भजन-कीर्तन जरूर करें। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है और पूजन का पूर्ण फल मिलता है।
ऐसा न करें महिलाएं......
- सुई धागे, कैंची अथवा सेफ्टीपिन का प्रयोग न करें।
- सोए हुए व्यक्ति को न उठाएं।
- निंदा-चुगली न करें।
- रूठे को मनाने जाएं।
- महिलाएं इस दिन जुआ न खेलें।