मियावाकी पद्धति से औद्योगिक आस्थानों में लगाए जाएंगे पौधे
जापान के वनस्पति वैज्ञानिक की है यह विधि, वन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग तैयार कर रहा कार्ययोजना
संवाद न्यूज एजेेंसी
फिरोजाबाद। जनपद के औद्योगिक आस्थानाें और व्यवसायिक क्षेत्रों में मियावाकी पद्धति से पौधरोपण-वनीकरण किया जाएगा। वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उद्यमियों की बैठक में यह तय हुआ। जापान के वनस्पति विज्ञानी की इस विधि से कम अथवा बेहद संकुचित जगहों पर भी अधिक से अधिक पौधे रोप कर वनीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस संबंध में वन विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
पर्यावरण के दृष्टिकोण से संवेदनशील फिरोजाबाद में वनीकरण व पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए मियावाकी पद्धति को प्रयोग में लाया जाएगा। वन विभाग के अनुसार, इस पद्धति से एक हेक्टेयर क्षेत्र में 30 से 35 हजार तक पौधे रोपे जा सकते हैं। इनमें अधिकांश पौधे बेहद कम पानी की सिंचाई में भी पनप जाते हैं। जिन जगहों पर उक्त पौधे रोपे जाते हैं। उसके आसपास भूमि पर नमी का प्रतिशत अन्य क्षेत्रों से कहीं अधिक होता है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बीके दुबे ने बताया कि फिरोजाबाद, मक्खनपुर औद्योगिक क्षेत्र के अलावा कम जगह वाले व्यवसायिक क्षेत्रों, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज आदि जगहों पर मियावाकी पद्धति से वनीकरण कराने की योजना तैयार की गई है। इस योजना को जिला समिति का अनुमोदन प्राप्त हो गया है।
इन पौधों का होगा रोपण
मियावाकी पद्धति में पलास और जमुना, कत्था, होलोप्टेलिया, बालानाइट्स, खैर, कचनार और चिलबिल आदि पौधे रोपे जाते हैं।
जापानी वैज्ञानिक द्वारा प्रयोग कर बेहद कम और संकुचित क्षेत्रफल वाली जगहों पर अधिक से अधिक पौधे रोपने की तकनीकी तैयार की गई। इस तकनीक को पूरे विश्व में सराहा गया है। हम मियावाकी पद्धति से फिरोजाबाद के औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्र में वनीकरण कराने की कार्य योजना बना रहे हैं।
- वींरेद्र कुमार सिंह, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी फिरोजाबाद