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उल्लास के साथ रखा पहला रोजा

Fri, 19 Jun 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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 रमजान माह का पहला रोजा रखने के साथ इबादतों का दौर चला। सदर बाजार स्थित जामा मस्जिद के साथ प्रमुख मस्जिदों में नमाज अदा की गई। मकबरा फीरोजशाह के साथ ही कई प्रमुख स्थानों पर तरावीह के पढ़ने का क्रम चला। पहला रोजा ही करीब 15 घंटे का हुआ।
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चांद दिखने के साथ ही पाक रमजान माह की शुरूआत हो गई। चांद दिखाई देने के साथ ही तरावीह पढ़ना शुरू कर दी। शाम को बस स्टेंड के समीप स्थित फीरोजाशाह के मकबरा पर तरावीह पढ़ने वालों की भीड़ रही। पहला रोजा के साथ जुमा होने के कारण नमाज अदा करने को मस्जिदों में भीड़ रही। पहला रोजा करीब15 घंटे का रहा। सुबह सहरी 3.45 बजे हुई वहीं इफ्तार का वक्त 7.17 था। इधर इस्लामिक सेंटर के सचिव आलम मुस्तफा याकूबी ने कहा रमजान के वक्त की कद्र करें। इफ्तार एवं सेहरी का वक्त अल्लाह से मांगने का वक्त है। अपनी आंख, कान एवं जुबान को बुराइयों से दूर
रखें। रोजे के इफ्तार के वक्त रोजेदार की दुआ को कुबूल किया जाता है। इस वक्त को इफ्तारी जमा करने और महिलाएं अपना वक्त रसोई एवं किचिन में न लगाकर उस वक्त को दुआ में लगाएं। रोजा सब्र एवं गमों को बांटने की शिक्षा देता है। पड़ोसियों के हक को अदा करने की शिक्षा देता है।
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सवालों पर इस्लामिक सेंटर के सचिव आलम मुस्तफा याकूबी के जवाब  
- महिलाओं को तरावीह पढ़नी चाहिए कि नहीं ?  
रोजा रखने वाली महिलाओं को 20 रकात तरावीह पढ़नी चाहिए।
- रोजे के दौरान उल्टी आने पर क्या रोजा टूट जाता है ?  
रोजे में यदि मुंह भरकर उल्टी होती है तो रोजा टूट जाता है,रोजे की कजा (दोबारा रोजा) रखना पड़ेगा।
- रोजे में बीमार हैं तो इंजेक्शन लगवा सकते हैं कि नहीं ?  
ऐसे इंजेक्शन जो सीधे नस में लगाए जाते हैं वह नहीं लगाए जा सकते हैं। मांस में लगाए जाने वाला इंजेक्शन तो लगवा सकते हैं लेकिन एनर्जी के लिए नहीं।
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