गुरुवार रात फिर से पिलख्तर बंबा कटने से नारखी और फरिहा के करीब 12 गांवों के किसानों की खेती जलमग्न हो गई। कटे बंबा के पानी को रोकने के लिए किसान अपने स्तर से प्रयास करते दिखाई दिए। किसानों में अधिकारियों के प्रति आक्रोश है।
गुरुवार रात फरिहा के रखावली गांव के समीप पिलख्तर बंबा कटने से फरिहा के गांव शीतलपुर, खुशकपुरा, अंधपुरा, इटारी, फरिहा देहात के साथ नारखी के नगला नौजी, कायथा, मिलिक, गांगनी, ओखरा, कुबेर गढ़ी के किसानों की करीब तीन सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई। इसकी जानकारी ग्रामीणों को शुक्रवार सुबह हो सकी। खेतों में भरा पानी और उसमें डूबी फसल को देख किसान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नेताओं को फोन करते रहे लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। बाद में उन्होंने अपने प्रयासों से जहां से बंबा कटा था उसे बंद किया। दोपहर बाद सपा जिलाध्यक्ष डा. दिलीप यादव के भाई नारखी के गांव कायथा पहुंचे और जानकारी हासिल की। किसानों ने मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
इन किसानों की फसल पानी में डूबी
अजब सिंह, गौरव, हरी सिंह, टीकम सिंह, लोखपाल, हेतपाल, भगवान सिंह, घनिराम, जयपाल सिंह, राजवीर, लाखन सिंह, जयवीर, प्रेमादेवी, श्यामपाल सिंह, विद्यादेवी, कुंवरलाल, दयाकिशन, देवलाल, मनोज कुमार, महाराज सिंह, फौरन सिंह, पितांबर सिंह, लोचन सिंह, हरीबाबू, अवधेश, राधेश्याम, अनिल, भीमसेन, रुकमपाल आदि किसान शामिल है।
फसल डूबने के साथ सपने भी टूटे
पानी में डूबी फसल को देख कई किसानों के होश उड़ गए। अच्छी फसल होने पर किसी ने बेटी की शादी तो किसी ने कर्जा चुकाने का सपना संजोया था लेकिन सब बर्बाद हो गया।