फिरोजाबाद। कोरोना काल में लाखों खर्च करके सीएचसी पर बनाए गए पीकू वार्ड गंभीर बच्चों का इलाज नहीं कर सके। यहां लगाए गए वेंटीलेटर, बाईपैप मशीन सहित अन्य उपकरण सिर्फ शोपीस बनकर रह गए। यहां आने वाले बाल रोगियों को सिर्फ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
सर्दी का मौसम शुरु होते ही निमोनिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कई गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। शासन ने संयुक्त अस्पताल शिकोहाबाद में 20 पलंग का पीकू वार्ड बनाया था। सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) एका, जसराना, जाटऊ और सिरसागंज में भी 12-12 पलंग के पीकू वार्ड बनाए गए। यहां वेंटिलेटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। ऑक्सीजन कन्संट्रेटर भी उपलब्ध कराए गए। एक-एक हाई फ्लो ऑक्सीजन मशीन भी उपलब्ध कराई गई। प्रत्येक बेड पर मल्टी पैरामॉनीटर भी लगवाए गए हैं। ये उपकरण अधिकांश सीएचसी में शोपीस बन गए हैं। बच्चों को इलाज के लिए शहर के मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है।
सीएचसी पर उपकरण तो उपलब्ध हैं, मगर बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। सीएचसी पर जहां तक संभव होता है मरीज का इलाज किया जाता है। ज्यादा गंभीर होने पर उसे रेफर कर देते हैं। उपकरणों को फिर से सक्रिय किया जाएगा। - डाॅ. पवन कुमार, एसीएमओ
इन अस्पतालों में बने थे पीकू वार्ड
मेडिकल कॉलेज-105
संयुक्त अस्पताल शिकोहाबाद- 20
सीएचसी जसराना- 12
सीएचसी एका- 12
सीएचसी जाटऊ-12
सीएचसी सिरसागंज-12