मत्स्य विभाग की ओर से स्वरोजगार स्थापित करने को बैंक से ऋण दिलाकर व विभागीय अनुदान देकर दिलाई मोबाइल फिश पार्लर की गाड़ी सवारियां ढोती दिखाई दी।
मत्स्य विभाग की ओर मछली पालन के साथ युवाओं को रोजगार स्थापित करने को मोबाइल फिश पार्लर योजना की शुरूआत की थी। मछली के विभिन्न उत्पादों को तैयार कर उनकी शहरी क्षेत्रों में बिक्री करना इसका उद्देश्य था। इस योजना के पात्रों को बैंक ऋण दिलाने के साथ ही विभाग की ओर से 1.65 लाख रुपये का भी अनुदान दिया जाता है। विभाग की ओर से गत दिवस एक मोबाइल फिश पार्लर की शुरूआत की गई थी। इस गाड़ी के चालक को सीडीओ सुजीत कुमार ने मुख्यालय से चाभी सौंपी थी। लेकिन एक वर्ष पूरा होने से पूर्व ही इस गाड़ी से सवारियां ढोना शुरू हो गया। रसूलपुर थाने के समीप जब मोबाइल फिश पार्लर वाहन से सवारियां उतरती दिखीं तो अमर उजाला के छायाकार ने फोटो खींच लिया। इससे चालक हड़बड़ा गया। इस मामले में उप निदेशक मत्स्य आरके श्रीवास्तव ने कहा कि मोबाइल फिश पार्लर योजना के तहत वाहन फिश के विभिन्न उत्पादों की बिक्री करने के लिए अनुदान पर दिलाया गया है। यदि कोई गाड़ी से सवारियां ढो रहा है तो उसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।