अखिल भारतीय सोह्म महामंडल के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ, गायत्री महायज्ञ और विराट संत सम्मेलन में सोह्म पीठाधीश्वर 108 स्वामी विवेकानंद महाराज ने ज्ञान की गंगा बहाई। भगवान वामन की कथा की झांकी देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
सोह्म पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि जीवन में आए अवसर का सदुपयोग करना चाहिए। महत्वपूर्ण समय बार-बार नहीं आता। गीता जयंती के अवसर पर महाराजश्री ने गीता के अनेक महत्वपूर्ण श्लोकों का अर्थ बताते हुए मानव जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानव बुद्धि का महत्व बताते हुए कहा कि देवताओं की बुद्धि भी कुंठित हो जाती है। अत: मानव जीवन प्राप्त कर समय का सदुपयोग करना चाहिए। स्वामी शिवचैतन्य ने कहा कि गीता जयंती के उपलक्ष्य में सभी को गीता के प्राप्ति के लिए प्रयास करना चाहिए। स्वामी ज्ञानानंद ने क्रोध आने के कारण बताए और उसके निदान के उपाय बताए। सोह्म पीठ के उत्तराधिकारी स्वामी सत्यानंद ने आत्म विषय विवेचन करते हुए कहा कि अपने स्वरूप को जानना अत्यंत आवश्यक है। व्यास जी राम गोपाल शास्त्री ने कथाएं सुनाईं। स्वामी प्रीतमदास, स्वामी निगमानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी अनंतानंत, सदानंद, राजेश्वरानंद, आनंद स्वरूप, गौरव स्वरूप ने भी प्रवचन दिए। कार्यक्रम के समापन पर श्रोताओं ने संतों का स्वागत किया एवं भगवान की आरती उतारी।