फिरोजाबाद। देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने की कवायद चल रही है। इसके तहत पोलियो अभियान की तर्ज पर अब ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाया जाएगा। ग्राम पंचायतों का सर्वे कर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से सम्मानित किया जाएगा। ब्लॉक स्तर की ट्रेनिंग में ग्राम प्रधान, सचिव, आशा तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा।पोलियो मुक्त भारत की तरह टीबी मुक्त बनाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। लखनऊ ट्रेनिंग लेकर आए मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर टीबी की बीमारी से बचाव की ट्रेनिंग देंगे। प्रत्येक ब्लॉक में तीन मास्टर ट्रेनर ट्रेनिंग देंगे। इसके बाद प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया जाएगा। जो यहां ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ट्रेनिंग देंगे। साथ ही ग्रामीणों को टीबी की बीमारी से बचाव के उपाय बताएंगे। साथ ही उसके लक्षणों से भी अवगत कराएंगे।अभी तक ग्रामीणों में यह भ्रांति है कि टीबी का कोई इलाज नहीं है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रधान, सचिव समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी उन्हें बताएंगे कि सही समय और पूरा इलाज होने पर टीबी की बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। तीन साल तक जिस ग्राम पंचायत में सबसे कम केस मिलेंगे वह टीबी मुक्त ग्राम पंचायत होने का दावा करेगी।
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जिले में 6500 हैं टीबी मरीज
-स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्तमान में जिले में 6500 टीबी के सक्रिय मरीज हैं। इसमें 250 मरीज एमडीआर टीबी से पीड़ित हैं, जो बेहत खतरनाक स्टेज है। विभाग लक्ष्य पूरा करने के लिए जांच कर मरीजों की संख्या खोजने में जुटा हुआ है।
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देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए अब कवायद पंचायत स्तरों से शुरू होगी। गांवों में सर्वे कराया जाएगा। जिस गांव में टीबी के मरीज नहीं मिलेंगे, उन उस पंचायत को टीबी मुक्त पंचायत के रूप में प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
मनीष कुमार, जिला सन्वयक क्षय रोग विभाग