नगला भाऊ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में भूमि के आवंटन प्रस्ताव की हकीकत जानने के लिए विशेेष जांच टीम ने सुहागनगरी में दस्तक दी। उद्योग निदेशालय द्वारा गठित टीम में शामिल संयुक्त निदेशक आगरा व कानपुर के अफसरों ने इंडस्ट्रियल एरिया में खाली पड़ी भूमि को देखा। इसके बाद जिला उद्योग केंद्र पहुंचकर मामले से संबंधित रिकार्ड तलब किए, जिससे जिला उद्योग केंद्र में खलबली मच गई।
मामला वर्ष 2010 से जुड़ा हुआ है। नगला भाऊ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 15 हजार वर्गमीटर प्रशासनिक भूमि खाली पड़ी हुई है। करोड़ों रुपये की जमीन पर इकाई लगाने के लिए सपा नेता ऊधम सिंह ने जिला उद्योग केंद्र से संपर्क किया। जमीन हासिल करने के लिए मंत्रियों से दबाव भी डलवाया गया। इस पर उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने जमीन सपा नेता के नाम आवंटित करने के प्रस्ताव को उद्योग बंधु की बैठक में पास कर 12 हजार वर्ग मीटर जमीन पर हैंडीक्राफ्ट यूनिट लगाने देने का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए निदेशालय भेज दिया था। आवंटन की स्वीकृति का मामला निदेशालय में जांच के लिए लंबित रहा।
उद्योग निदेशालय में प्रस्ताव अटकने पर ऊधम सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने उद्योग निदेशालय से चार सप्ताह में शपथ दाखिल करने के निर्देश दिए थे। निदेशालय ने मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी थी। निदेशालय के निर्देश पर संयुक्त निदेशक आगरा सुधांशु मोहन, असिस्टेंट कमिश्नर मुख्यालय कानपुर हरिराम गौतम, अपर सांख्यकी अधिकारी गुरुदेव ने मामले की जांच के लिए सुहागनगरी में दस्तक दी। टीम में शामिल अफसरों ने पहले इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित जमीन का मुआयना किया। इसके बाद अफसरों ने जिला उद्योग केन्द्र पहुंचकर करीब एक घंटे तक मामले से संबंधित रिकार्ड तलब किए। मामले की जांच के साथ अफसर रिकार्ड भी अपने साथ ले गए। संयुक्त निदेशक आगरा सुधांशु मोहन का कहना है कि इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़े मामले की जांच के लिए आए थे। जमीन किसको दी जाएगी, किसको नहीं, इस पर अंतिम निर्णय निदेशालय स्तर पर लिया जाएगा।