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एनजीटी की सूची से उद्यमियों में खलबली

Tue, 07 Jul 2015 09:49 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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यदि एनजीटी का हंटर चला तो सुहागनगरी के कई कांच इकाइयों पर बंदी की गाज गिर सकती है। एनजीटी की रडार पर आई छह दर्जन इकाइयों के नाम सामने आने के बाद उद्यमियों के होश उड़ गए हैं। अब उद्यमी एनजीटी की मार से बचने को इधर-उधर हाथ-पांव मार रहे हैं।
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सुहागनगरी में बढ़ रहा प्रदूषण का मानक कांच उद्योग के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। प्रदूषण फैलाने के नाम पर आए दिन जारी होने वाले नित-नए फरमान उद्यमियों के गले की फांस बन गए हैं। वहीं दूसरी ओर बोतल उद्योग को समाप्त करने के लिए बड़े ग्रुप लगातार लॉबिंग करने में जुटे हैं।  इससे भी कांच उद्योग मुसीबत में घिरा हुआ है।  इधर उद्योग एवं प्रदूषण बोर्ड की मिलीभगत के चलते रातोंरात कई छोटी इकाइयां काफी बड़ी हो गईं। इन इकाईयों की प्रोडेक्शन क्षमता में काफी विस्तार हो गया तो कई इकाइयां पीसीबी की अनुमति के बगैर ही सुहागनगरी में प्रदूषण का मानक बढ़ा रही हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर कराए गए सर्वे में यह बात खुलकर सामने आई थी। सुहागनगरी में प्रदूषण फैला रहीं पांच दर्जन इकाईयां एनजीटी के रडार पर आ गई हैं। यह वही इकाइयां हैं, जिन्हें पीसीबी ने क्षमता विस्तार का आरोप लगाते हुए सहमति नहीं दी थी। अब नोटिस जारी होने के बाद उद्यमियों में खलबली मची हुई है।

बाक्स--
एनजीटी की सूची में शामिल इकाइयां
जगदी ग्लास वर्क्स, जयना ग्लास उद्योग, महेश ग्लास वर्क्स, सन ग्लास, शिवम ग्लास, डीलक्स ग्लास, जनरल ट्रेडर्स, गिरिनार ग्लास, इंपीशियल ग्लास, जैसन ब्लाक ग्लास, लिबर्टी इंडस्ट्रीज, नादर बक्स एंड को., न्यू बंसल ग्लास, दुर्गा ग्लास, टेक्निकल ग्लास, आनंद ग्लास वर्क्स, फीरोजाबाद सिरेमिक, गोल्डन ग्लास, हरिओम ग्लास, मीरा ग्लास, नन्नूमल ग्लास, रचना ग्लास इड., अजंता ग्लास वर्क्स, आकाशदीप ग्लास, आरके ग्लास वर्क्स, भगवती ग्लास, चंद्रभान ग्लास वर्क्स, क्राउन ग्लास इड., दुर्गा ब्लाक एंड चाइना ग्लास वर्क्स, ईस्टर्न ग्लास वर्क्स, हदौरिया ब्लाक ग्लास, इरफान ग्लास, जुपीटर ग्लास, मनोज ग्लास, माथुर ग्लास, नरायन ग्लास, नवीन ग्लास, न्यू सुपर ग्लास, ओरियंट ग्लास, पद्मावती कांच उद्योग, प्रेम ग्लास, प्रिंस ग्लास, पुरुषोत्तम ग्लास, सरस्वती ग्लास, श्री भवानी ग्लास, स्टार ग्लास, यूनिवर्सल ग्लास, वेद ग्लास, विजेता ग्लास, श्री बीके ग्लास, नेशनल ग्लास, खान ग्लास, गौरव ग्लास, सौभाग्य ग्लास, पारस ग्लास, आलोक ग्लास, क्रिस्टल ग्लास, फाइन ग्लास, श्री गुरुनानक ग्लास, टाइगर ग्लास शामिल हैं।
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एनजीटी का आरोप
फीरोजाबाद में 60 ग्लास उद्योग बिना स्थापना और परिचालन की अनुमति के चल रहे हैं। बिना आवश्यक अनुमति के चलने वाले ग्लास उद्योग न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, अपितु फीरोजाबाद के निवासियों को विषाक्त प्रदूषकों के बीच जीवन जीने को बाध्य कर रहे हैं। पहले से ही संवेदनशील ताज ट्रिपेजियम जोन की वायु गुणवत्ता को बदतर कर रहे हैं। एनजीटी ने उद्योगों को बंद कराने के अनुरोध किया है।  

तीन अगस्त तक देना है जवाब
एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) यूपी सरकार और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने सभी से तीन अगसत तक जवाब मांगा है।

70 फीसदी इकाइयों को मिल चुकी पीसीबी की सहमति
एनजीटी द्वारा जिन 60 इकाइयों को बिना अनुमति के चलने की बात कही गई है, इनमें करीब 70 फीसदी इकाइयों को प्रदूषण बोर्ड नियंत्रण बोर्ड से भी सहमति मिल चुकी है। सात जनवरी 2015 को आयोजित टीटीजेड अॅथारिटी की बैठक क्षमता विस्तार करने वाली इकाइयों हरी झंडी दे दी गई थी। वहीं एनजीटी के समक्ष पेश सूची सितंबर 2014 की बताई जा रही है।
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