यमुना की तलहटी में खड़ी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामदासपुरा की पौने दो करोड़ की चमचमाती इमारत से सरकारी सिस्टम की ''''उत्कृष्ट शिक्षा'''' की तस्वीर तो सच हो रही है। मगर, इस विद्यालय के भीतर एक ऐसा कड़वा सच छिपा है, जो शिक्षा महकमे और शासन के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। यहां सिस्टम की नाकामी और विभाग की अनदेखी ऐसी है कि चार साल से विभाग यहां शिक्षकों की पूर्ण क्षमता के साथ तैनाती करना ही भूल गया।
वर्ष 2022 से शुरू हुए इस राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई का दावा किया जाता है। यहां 17 शिक्षकों के पद तो स्वीकृत कर दिए, लेकिन अधिकारी तैनाती करना ही भूल गए। आलम यह है कि 4 साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा का पूरा कॉलेज सिर्फ 5 शिक्षकों के कंधों पर घिसट रहा है। हद तो यह है कि विद्यालय में एक पूर्णकालिक प्रधानाचार्य तक की कुर्सी खाली पड़ी है। बड़ा सवाल चार साल से यह है कि जब 12 पद खाली पड़े हैं, तो यह नियुक्ति की फाइल आखिर किस अलमारी में धूल फांक रही है। क्या पौने दो करोड़ की इमारत सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा खड़ा करने और बजट ठिकाने लगाने के लिए बनाई गई थी। आखिर कब यहा शिक्षकों की तैनाती होगी।
गणित के गुरुजी ही बन गए ऑल-इन-वन
रामदासपुरा के इस विद्यालय को कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय तीनों की मान्यता प्राप्त है। कागजों में भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल और कॉमर्स जैसी भारी-भरकम डिग्रियों का ढोल पीटा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां गणित के प्रवक्ता ही बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं।
बच्चों के बयानों में टीस
छात्रा सलोनी ने बताया कि शिक्षक मेहनत तो करते हैं, लेकिन संख्या इतनी कम है कि विषयों को समय ही नहीं मिल पाता। इंटर में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होंगे, तो हम बोर्ड परीक्षा कैसे पास करेंगे।
छात्र श्रीकृष्णा ने कहा कि बिल्डिंग बहुत बढ़िया है, लेकिन गुरुजी ही गायब हैं। अगर हर विषय के टीचर मिल जाएं, तो हमारे सपने अधूरे न रहें।
अधिकारी का जवाब
जब इस गंभीर मामले पर जिम्मेदार कुर्सी पर बैठीं डीआईओएस मुदिता पांडेय से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी ली जाएगी, तैनाती शासन स्तर से होती है। पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
प्रधानाध्यापक दिनेशचंद्र ने बताया कि विद्यालय में स्वीकृत पदों के सापेक्ष शिक्षक कम हैं। उपलब्ध शिक्षकों के माध्यम से कक्षाओं का संचालन कराया जा रहा है। रिक्त पदों पर शिक्षकों की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।