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विधायक हरिओम के खिलाफ भतीजे प्रवेंद्र ने ठोंकी ताल

Tue, 20 Sep 2016 12:49 AM IST
Amar Ujala
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विधायक हरिओम के खिलाफ भतीजे प्रवेंद्र ने ठोंकी ताल - फोटो : Amar Ujala
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सिरसागंज विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा की
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मैनपुरी के सांसद तेज प्रताप के मामा, हरिओम के भतीजे और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में सलाहकार हैं प्रवेंद्र,  
समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान के बीच सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के सलाहकार प्रवेंद्र यादव उर्फ लाला ने सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस विधान सभा क्षेत्र से प्रवेंद्र के चाचा हरिओम यादव विधायक हैं।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रवेंद्र यादव ने यह घोषणा तब की, जबकि पार्टी पहले ही सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक हरिओम यादव को चुनाव लड़ाने का साफ संकेत दे चुकी है। प्रवेंद्र का सैफई परिवार से सीधा रिश्ता है। मुलायम सिंह यादव के भतीजे और मैनपुरी के सांसद तेज प्रताप सिंह प्रवेंद्र के भांजे हैं। प्रवेंद्र ने बताया कि अभी उन्होंने पार्टी से टिकट मांगा है। यह क्षेत्र की जनता की आवाज है। टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यूं तो अब समीकरण बदले हुए हैं ऐसा नहीं होगा कि टिकट न मिले। फिरर भी आगे क्या करना है यह तब की परिस्थिति देख कर तय किया जाएगा, लेकिन चुनाव जरूर लड़ेंगे।
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सपाध्यक्ष शिवपाल यादव के एमएलसी अरविंद यादव सहित कई प्रमुख सपा नेताओं को पार्टी से बाहर निकाले जाने पर प्रवेंद्र यादव ने कहा कि जो गलती करेगा उसे सजा तो मिलेगी, मैं भी गलती करूं तो मुझे भी सजा मिले। शिवपाल प्रदेशाध्यक्ष हैं, बडे नेता हैं, उन्होंने जरूर कुछ न कुछ ऐसा गलत पाया होगा जो कार्रवाई की। पार्टी में कोई विवाद नहीं है नेताजी ने सब कुछ ठीक कर दिया है। परिवार का झगड़ा उनका पारिवारिक मामला है। भीतर घात और पार्टी विरोधी काम करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब सटीक निर्णय और सही फैसले लिए जा रहे हैं। इस बार फिर सरकार बनानी है। स्वच्छ छवि वालों को प्रदेशाध्यक्ष टिकट देंगे।
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 जिला पंचायत चुनाव हार गए थे प्रवेंद्र
प्रवेंद्र यादव ने वार्ड नं. 33 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था और वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की तैयारी कर रहे थे। लेकिन वह यह हार गए थे, इस हार के लिए उनके समर्थकों ने विधायक हरिओम यादव पर निशाना साधा था। हार के बाद चाचा हरिओम यादव से उनकी रार बढ़ गई थी। बाद में परिवहन विभाग में सलाहकार बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा देकर उन्हें संतुष्ट किया गया था।
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