भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए फीरोजाबाद से नेपाल भेजे गए आलू की गोरखपुर के महेवा में बिक्री की बात उजागर होते ही प्रशासन हरकत में आ गया। आनन फानन डीजल और रुपयों का इंतजाम करवाकर चारों ट्रक नेपाल भेजे गए। अमर उजाला की खबर के बाद मामला उजागर हुआ तो प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। फीरोजाबाद और आगरा के सहयोग से किराए की व्यवस्था की गई और चारों ट्रकों को नेपाल के लिए रवाना किया है।
बता दें कि भूकंप पीड़ितों की इमदाद की बोली लगाकर ट्रक चालकों ने अपनी जेबें भरी थीं। पीड़ितों के लिए भेजा गया आलू किराए के अभाव में गोरखपुर की महेवा मंडी में बिक्री की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया। मंडी के सचिव आरके सिंह ने कहा चार ट्रक आलू को नेपाल भेजने के लिए किराए के लिए 45 हजार रुपये की व्यवस्था मंडी के स्टाफ ने एक दिन का वेतन देकर की थी। उन्होंने कहा कि 30 हजार से भी अधिक धनराशि की और जरूरत थी। इसकी व्यवस्था आगरा के सहयोग से रविवार को कराई गई है। आगरा के व्यापारियों से सीधे महेवा मंडी के व्यापारियों से बात होने के बाद किराए की धनराशि चालक एवं परिचालकों को दे दी है।
नेपाल की महंगाई से भी कतरा गए थे चालक परिचालक
भूकंप पीड़ितों को राहत सामग्री चालक, परिचालक नेपाल ले जाने से कतरा भी रहे थे। खाना काफी महंगा एवं पानी की बोतल 40 रुपये की होने की बात कहकर खर्चा अधिक मांग रहे थे। इसके कारण ही विवाद की स्थिति बनी। मंडी के प्रभारी एसडीएम सदर से बात करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी।