खराब एमडीएम दिखाती शिक्षिका एवं छात्र।
नगर क्षेत्र के स्कूलों में एनजीओ द्वारा मिड-डे मील की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को परोसी गई रोटी की गुणवत्ता की शिकायत शिक्षकों एवं स्कूल के बच्चों ने की।
शासन द्वारा निर्धारित एमडीएम मीनू में सोमवार को रोटी-सब्जी का टर्न था। हालांकि एनजीओ ने जो रोटी बच्चों को परोसी, वो बिल्कुल सूखी थी। प्राथमिक विद्यालय स्टेशन रोड कन्या में प्रधानाध्यापिका ताजिबर फातिमा ने बताया कि जिस दिन रोटी सब्जी आती है, उस दिन बच्चे एमडीएम नहीं खाते हैं। उन्होंने बताया कि रोटी कच्ची और सूखी होती है। सब्जी में आलू के छिलके बहुत होते हैं, जिसे बच्चे खाकर थूकते रहते हैं। प्राइमरी कोटला बालक के शिक्षक जब्बार अली ने भी रोटी की गुणवत्ता असंतोषजनक बताई। विभागीय लोगों के मुताबिक एनजीओ अन्य शहर से रोटी बनवाती है और बच्चों को वितरण कराती है। प्राइमरी विद्यालय कोटला बालक में एमडीएम की गुणवत्ता भी बच्चों को पसंद नहीं आई। एमडीएम कोऑर्डिनेटर अनमोल कुमार ने कहा कि आगे से एमडीएम की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
सस्ते संतरों पर गुरुजी की रही निगाहें
फल वितरण योजना एनजीओ और गुरुजी के लिए मुनाफे का सौदा बन गई है। नगर क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को एक-एक संतरे का वितरण किया गया, वो भी छोटे-छोटे। बाजार में 25 रुपये किलो संतरा फुटकर मिल रहे हैं लेकिन थोक बाजार में 15-20 रुपये किलो संतरा है। शासन से चार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से फल का रुपया दिया जाता है।
एनजीओ को गुणवत्ता सुधार के लिए कई बार नोटिस दिया जा चुका है। पहले से कुछ सुधार हुआ है। हम चेतावनी फिर देंगे कि बच्चों को एमडीएम ठीक से नहीं मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
सच्चिदानंद यादव, बीएसए
आचार संहिता लगी, फिर भी लगे बैनर
आचार संहिता अभी लगी हुई है। इसके बावजूद स्कूलों में समाजवादी फल वितरण योजना के बैनर नजर आ रहे हैं। प्राइमरी विद्यालय तिलक बालक में दीवार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का फोटो लगा बैनर दिखाई दिया।