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नई आबादी क्षेत्रों में तेजी से पनप रही बाल श्रम जैसी कुप्रथा

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फिरोजाबाद। निगम क्षेत्र में नई आबादी वाले इलाकों में बाल श्रमिकों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण खेलने-कूदने की उम्र में बच्चें दो जून की रोटी कमाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। कानपुर की (सोशल डवलपमेंट एंड मैनेंजमेंट सोसाइटी) संस्था द्वारा कराए सर्वे की रिपोर्ट पर अगर गौर करें तो निगम क्षेत्र के 70 में से 47 वार्डों में 4773 बाल श्रमिकों की पहचान की गई है।
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कांच और चूड़ी उत्पादों के लिए प्रसिद्ध सुहागनगरी में बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति का दाग गहरा रहा है। बाल कल्याण सोसाइटी द्वारा कराये कानपुर की एक संस्था द्वारा कराए सर्वे की रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र के 47 वार्डों में 4773 बाल बच्चें किसी ने पढ़ाई-लिखाई एवं खेलने-कूदने की उम्र में आजीविका कमाने को पसीना बहा रहे हैं।
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक छह से आठ वर्षीय 1384 बच्चे, नौ से 13 वर्षीय आयु वर्ग के 2525 बच्चों के अलावा 14 से 18 वर्षीय 864 किशोर किसी ने किसी जोखिम अथवा गैर जोखिम वालें कार्यों में संलग्न हैं। यह स्थिति निगम के कुल 70 वार्डों में से कुल 47 की है।
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इन इलाकों में बाल श्रमिकों की संख्या खासी-
चूड़ी झलाई, कटाई, जुड़ाई, सदाई का कार्य निगम क्षेत्र की नई आबादी वाले वार्डों में कुटीर उद्योग की भांति पनप रहा है। इन कार्यों में कच्ची उम्र के बालक-बालिकाओं के अलावा किशोरों की संख्या खासी है। खास तौर पर छपरिया, सैलई, आजादनगर, करबला, न्यू रामगढ, डाक बंगला, लालपुर, आसफाबाद, ठारपूठा मक्का कॉलोनी आदि करीब 60 बस्तियों में बाल श्रम जोर पकड़ रहा हैं।
होटल-ढ़ाबा पर नहीं पड़ती जिम्मेदारों की नजर-
फिरोजाबाद के औद्योगिक आस्थानों एवं घनी आबादी वाले कई इलाकों में संचालित होटल-ढाबों पर छोटे-छोटे मासूम बालक काम करते आसानी से दिख जाते हैं। लेकिन बाल कल्याण से जुडे़ श्रम विभाग, प्रोबेशन विभाग एवं पुलिस विभाग के अफसरों की नजरें इन कामकाजी बालकों पर नहीं पड़तीं।
छापामारी में पकड़े गये थे 41 बच्चे, 20 पर कार्रवाई
गत दिनों बाल श्रम के विरुद्ध चलाए अभियान के दौरान शहरी क्षेत्र में संचालित होटल-ढाबों पर 41 बच्चें काम करते मिले। इनमें 20 सेवायोजकों पर कार्रवाई भी की गई। बाल श्रम में संलिप्त बच्चों की सूची बीएसए को अग्रसारित कर शिक्षा केंद्रों पर प्रवेश कराने को कहा था।
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अरुण कुमार सिंह श्रमायुक्त
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