अब पड़ोसी भी प्रयोग नहीं करने देते हैं शौचालय, ओडीएफ घोषित है गांव
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) घोषित महीपुरा गांव में आज भी ग्रामीण खुले में शौच जाने को विवश हैं। पड़ोसी जो पहले खुद शौचालय का प्रयोग करने की पहल करते थे वे भी अब प्रयोग नहीं करने देते। ग्रामीण आज खुले में शौच जाने को विवश हैं। प्रधान एवं सचिव से कई बार शिकायत की लेकिन हल कुछ नहीं निकला।
सवर्ण बाहुल्य 350 की आबादी वाले गांव महीपुरा को प्रशासन ओडीएफ घोषित कर चुका है। गांव में 50 के करीब शौचालय बनाए गए। अमर उजाला की टीम गांव पहुंची तो ग्रामीण बोले 50 प्रतिशत लोग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। कई घरों में शौचालय तक नहीं बनाए गए। गांव के दुर्गपाल पुत्र भीकमपाल सिंह, धर्मेंद्र पुत्र सुनहरीलाल, रूपेंद्र पुत्र जुगेंद्रपाल सिंह, चंद्रभान पुत्र ओमप्रकाश के घरों में शौचालय नहीं बने। उनका कहना था कि उस समय तो पड़ोसी भी शौचालय प्रयोग कराने को तैयार हो गए थे। लेकिन आज कोई नहीं जाने देता। कंचनपाल सिंह पुत्र विजेद्रपाल सिंह का तो शौचालय काफी दिनों से बंद पड़ा है। प्रयोग नहीं होने के कारण हरी घास उग गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय बनवाए जाते तो दिक्कत नहीं होती। अब तो विभागीय अधिकारी भी गांव में नहीं आते।
शौचालय ही नहीं खुले में शौच जाने को विवश
-संयुक्त परिवार होने तथा परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण एक शौचालय से काम नहीं चलता। यही कारण है कि खुले में शौच जाने को विवश हैं।
अनीता, महीपुरा
-शौचालय बना ही नहीं है यही कारण है कि खुले में शौच जाते हैं। अधिकारी अब कोई गांव में नहीं आता। ओडीएफ के नाम पर खानापूरी की गई।
सत्यनरायन, महीपुरा
-हमारे घर शौचालय गांव की राजनीति के कारण नहीं बन पाया। प्रधान एवं सचिव से कई बार कहा था। लेकिन शौचालय नहीं बनवाया गया तो फिर खुले में शौच जाने को विवश हैं।
धर्मेंद्र, महीपुरा
मेरा नाम सूची में था। प्रधान एवं सचिव ने मेेरे यहां शौचालय नहीं बनने दिया। अब मेरे परिवार सहित आधे से अधिक ग्रामीण खुले में शौच जाने को विवश हैं।
यतेंद्र सिंह, महीपुरा
संदलपुर में 200 पात्रों को नहीं मिला पैसा
गरीब पात्रों को 16 को दिए जाएंगे चेक
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक राजीव नयन गुप्ता ने कहा कि हाथवंत ब्लाक के ओडीएफ घोषित गांव संदलपुर में 16 सितंबर को खुली बैठक की जाएगी। जिसमें संदलपुर में चिह्नांकित 48 परिवारों को 12 हजार प्रति शौचालय की दर से चेक दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभागीय मानक के अनुरूप ही शौचालय बनाए जाने के पश्चात उन्हें दिए जाने वाले चेक पर प्रधान एवं सचिव हस्ताक्षर करेंगे। सवाल यह है कि गांव में पहले 304 पात्र थे। विभागीय रिकार्ड में 104 का भुगतान किया गया है। आखिर 200 का पैसा कहां गया। क्या जिले के जिम्मेदारी अधिकारी यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं?