नगला भाऊ औद्योगिक आस्थान में टैंक फर्नेस वाली चूड़ी इकाइयों में मानदेय बढ़ोत्तरी को लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। इस कारण कामकाज पटरी से उतर गया। पहली शिफ्ट में काम शुरू होने के चंद मिनट बाद कामबंदी के चलते चूड़ी उत्पादक कारखानेदारों को तीन करोड़ से ज्यादा की चपत लग गई।
मानदेय बढ़ाने की मांग
करीब एक पखवाड़ा पहले शुरू हुई कांच चूड़ी श्रमिकों की लामबंदी फिर से मुखर होती दिख रही है। मानदेय बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर कांच चूड़ी श्रमिकों ने बीते दिनों फिरोजाबाद व मक्खनपुर स्थित टैंक फर्नेस वाली कांच चूड़ी इकाइयों में हंगामा के बाद कामबंदी करा दी थी। हालांकि कुछ दिन शांति के बाद शहर के कांच चूड़ी उद्योग जगत में फिर से कामबंदी का संकट गहराने लगा है। मंगलवार सुबह औद्योगिक आस्थान नगला भाऊ स्थित आधा दर्जन कांच इकाइयों में हंगामा के बाद काम हो गया।
बंद करा दिया काम
जानकारी के अनुसार नगला भाऊ स्थित टैंक फर्नेस कांच चूड़ी इकाइयों में सुबह छह बजे काम सुचारू रहा, लेकिन अचानक साढ़े छह बजे कांच चूड़ी इकाइयों में कुछ बाहरी श्रमिक आ धमके। बाहरी श्रमिकों ने कांच चूड़ी इकाइयों में हंगामा काटते हुए एक बाद एक छह कांच इकाइयों में काम बंद करा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक श्रमिक मानदेय में वार्षिक बढ़ोत्तरी को नारेबाजी कर रहे थे।
इन इकाइयों में कामबंदी के हालत
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सबसे पहले आस्थान स्थित इलेक्ट्रॉनिक ग्लास वर्क्स में हंगामा के बाद कामबंदी हुई। इसके बाद श्रीनाथ ग्लास, अजंता ग्लास के अलावा कुल छह इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया के बीच में ही काम ठप हो गया।
सहमे कारखानेदार, ले सकते हैं बड़ा फैसला
एक माह की अवधि में तीसरी बार उत्पादन प्रक्रिया के बीच कामबंदी से चूड़ी कारखानेदार सहम गए हैं। कारखानेदारों के अनुसार लाखों रुपये का कांच और रियायती दर वाली गैस बेकार में फुंक गई। श्रमिकों का रवैया समझ से परे है। ऐसे में स्थाई हल निकलने तक टैंक फर्नेश वाली इकाइयों में शटडाउन ही एक मात्र विकल्प है।
कराई जाएगी जांच
सहायक श्रमायुक्त यशवंत कुमार ने बताया कि कांच चूड़ी इकाइयों में हंगामा व कामबंदी की जांच कराई जाएगी। श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी लगातार संपर्क में हैं। अचानक कामबंदी गलत है। जिम्मेदारों से वार्ता कर हल निकाला जाएगा।