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पचास करोड़ के कारोबार की चपत 

Mon, 14 Nov 2016 12:48 AM IST
राजकुमार
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करेंसी के कारण सुहागनगरी का कारोबार चौपट हो गया। - फोटो : अमर उजाला
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 करेंसी के कारण सुहागनगरी का कारोबार भी चौपट हो गया। चूड़ी बाजार में सन्नाटा है। दूरदराज के कारीगरों ने घरों की ओर रुख कर लिया। दुकानदारों को चिंता इस बात की है कि पांच सौ या हजार का नोट लेने से इंकार करना कब उनके लिए महंगा पड़ जाए। इस कारण आधा शटर खोलने को विवश हैं। पिछले पांच दिनों में किराना कारोबार को दस करोड़, चूड़ी को करीब 15 करोड़ की चपत लगी। वहीं अन्य बाजार को यदि देखें तो 50 करोड़ से भी अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ। 
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किराना कारोबार को पांच दिनों में दस करोड़ की चपत 
किराना की करीब 300 दुकानें। 80 बड़ी दुकानों पर करीब प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख से अधिक की बिक्री करेंसी पर रोक होने से पूर्व होती थी। लेकिन वर्तमान में 20 से 25 हजार तक सिमट गई। 120 दुकानों पर 75 हजार से एक लाख तक बिक्री होती थी, जो घटकर पांच से दस हजार ही रह गई। इस कारण पिछले पांच दिनों में करीब दस करोड़ की चपत लगी है। किराना एसोसिएशन के महामंत्री पंकज गुप्ता का कहना है कि पैसा नहीं लेने पर विवाद हो रहे हैं। 

चूड़ी उद्योग को लगी 15 करोड़ की चपत 
पांच सौ एवं एक हजार की नोट बंदी से सुहागनगरी का चूड़ी उद्योग भी सहम गया है। शहर में चलने वाले 20 हजार से अधिक चूड़ी गोदाम और दुकानें बंदी की कगार पर है। श्रमिक चैक लेने को तैयार नहीं। लिहाजा पिछले पांच दिनों में करीब 15 करोड़ की चपत लग गई। दूसरे शहरों से आना वाला कारीगर घर लौटने लगा है। हरियाणा पंजाब चूड़ी व्यापार मंडल के आनंद अग्रवाल ने कहा कि पीएम मोदी जी का नीतिगत फैसला अच्छा है लेकिन आधी-अधूरी तैयारियों के कारण आमजन को दिक्कत हो रही है।  
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गरीबों के बाजार में सन्नाटा 
शहर में चूड़ी के लगने वाले गड्डा बाजार में सन्नाटा है। करेंसी के अभाव में बिहार, छत्तीसगढ़ से आने वाले भी गरीब तबके के लोगों ने आना बंद कर दिया।  

80 प्रतिशत ने जन धन योजना वाले खाते जमा कराए रुपये 
एसबीआई के मुख्य प्रबंधक डीके वर्मा ने कहा कि रविवार को बैंक में जनधन योजना के एकाउंट में धनराशि जमा करने वालों की अधिक भीड़ रही। एक हजार ने यदि पैसा जमा कराया तो उसमें 700 लोग 49 हजार रुपये वाले थे, जिनके खातों में खुलने के बाद कोई धनराशि जमा नहीं हुई।
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