लोहिया गांवों का विकास सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कुछ गांवों को चिह्नित कर लोहिया गांवों के रूप में घोषित किया है। लक्ष्य बनाया गया है इन गांवों के चहुंमुखी विकास का। सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन का जिम्मा जिले के अधिकारियों पर डाला गया लेकिन अधिकारियों ने लोहिया गांवों की सुध तक नहीं ली। शासन की मंशा को पलीता लगाते नौकरशाहों ने सीएम के आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया। इसका अंदाजा ‘अमर उजाला’ को लोहिया गांव सोफीपुर में लगा। यहां शौचालय, सीसी गलियां अधूरी थीं। मुख्य रास्ता दल-दल में तब्दील था। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र भवन में ताला लटका था। लोहिया आवास की गुणवत्ता भी ठीक नहीं थी
सदर ब्लाक के सोफीपुर गांव का चयन 2013-14 में लोहिया गांव के रूप में किया गया था। ऐसे में ग्रामीणों को गांव में विकास की उम्मीद जगी। ग्रामीणों को गांव की गलियाें के पक्के होने, घरों में शौचालय बनने, सोलर लाइट से गांव के जगमगाने और टंकी से मीठा पेयजल मिलने की आस थी। हालांकि चयन के दो वर्ष बाद भी हालत बदतर हैं। यहां रास्तों पर गंदा पानी भरा है। गांव के अधिकांश हैंडपंप खराब हैं तो कई हैंडपंप जमीन में धंसे। नगला में बने सीसी मार्ग के किनारे लगे तीन हैंडपंप पानी ही नहीं देते।
शौचालयों के गड्ढों को छोड़ दिया अधूरा
स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनाने के तहत 393 शौचालयों का निर्माण सोफीपुर में कराया जाना प्रस्तावित है। हालांकि गांव के हाकिम सिंह निषाद के घर गड्ढा बनाकर ही काम बंद कर दिया गया। धीरी सिंह के शौचालय का गड्ढा ही नहीं बनाया। राजवीर के मकान के गड्ढे ख्रोदने के बाद पटाव नहीं कराया गया है। कृष्णादेवी पत्नी कामता प्रसाद के घर के ही अंदर गड्ढे बनाकर चार माह पूर्व से अधूरे छोड़ दिए। वह कहती हैं कि बच्चे गड्ढों में गिरते हैं, बारिश के दिनों में दिक्कत होती है।
52 में 40 हैंडपंप खराब
पेयजल की सुविधा के लिए गांव में पेयजल टंकी के साथ 52 हैंडपंप लगवाए गए। हालांकि अब इनमें से मात्र 22 ही पानी देते हैं। 40 ने पानी देना बंद कर दिया। टंकी का पानी ज्ञान सिंह मुखिया के घर में नहीं पहुंचता। गांव में कई ऊंचे मकान होने के कारण लोग पानी आने का इंतजार करते रहते हैं।
सोफीपुर में अधूरे पड़े हैं सीसी मार्ग
वासुदेव के घर से नवाब सिंह के मकान तक सीसी निर्माण कार्य नालियां बनाने के बाद अधूरा छोड़ दिया गया है। अभी तक इसका निर्माण नहीं कराया गया है। गंदगी के कारण मच्छरों ने लोगों को बेहाल कर रखा है। गांव के मुन्नालाल के मकान से जाटव बस्ती की ओर जाने वाला मार्ग भी अधूरा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान ने अपने घर की ओर जाने वाले मार्ग पर खड़ंजा होने के बाद सीसी युक्त ही बनवा लिया।
लोहिया आवास का काम धीमा
सोफीपुर को अधिकारी भले ही संतृप्त की सूची में डालने की तैयारी कर रहे हों लेकिन लोहिया आवासों के निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका है। भूरी देवी पत्नी सूबेदार सिंह का आवास बना और पीला रंग कर दिया। इनके मकान में दरवाजा काफी खराब है। गुड्डी देवी पत्नी राम सिंह के लोहिया आवास का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें मसाला घटिया प्रयोग हो रहा है। कमला देवी और साधना देवी के मकान बनकर तैयार थे लेकिन उन्हें खुद पैसा मिलाना पड़ा।
प्रधान के घर तक चमाचम रास्ता, जगमगाती है लाइटें
ग्राम प्रधान यतीश कुमार के घर की ओर जाने वाला रास्ता सीसीयुक्त है। वहीं मार्ग के दोनों ओर सोलर लाइटें जगमगाती है। वहीं गांव के अन्य हिस्सों में पूरी तरह से अंधेरा छाया रहता है।
लोहिया गांव जैसा नहीं हुआ विकास
यतीश कुमार को मैने प्रधानी लड़वाई। पूरे दिन रात्रि एक किए, लेकिन आज मेरोइए ख्याल नाए रखो। गली देखो जे रही कच्ची है। मच्छर हावी रहते है। हैंडपंप तक ठीक नहीं करायौ।
ज्ञान सिंह मुखिया
लोहिया गांव होने के बाद पानी का संकट है। 52 में से 40 हैंडपंप खराब है। डीएम एवं सीडीओ आए, तभी गांव के हैंडपंप ठीक कराए गए थे। उसके बाद फिर खराब हो गए तो कोई ध्यान नहीं दिया।
कमल वर्मा
प्रधान वाली गली में खड़ंजा होने के बावजदू सीसी करा दी गई लेकिन गांव की अन्य गलियों का ध्यान नहीं रखा गया। धर्मशाला व स्कूल तक के हैंडपंप खराब हैं।
महेशचंद्र वर्मा
लोहिया गांव का विकास जैसा होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ। सीसी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। कोई अधिकारी एवं सचिव ध्यान नहीं देते हैं।
गिरीश कुमार
गांव का समुचित विकास कराया जा रहा है। कुछ हैंडपंप खराब हैं, उन्हें रीबोर कराया जाएगा। शौचालयों का काम शीघ्र ही पूरा होगा। दल-दलयुक्त रास्ता पीडब्ल्यूडी के हिस्से में आता है। इसके लिए प्रयासरत हूं।
यतीश कुमार प्रधान सोफीपुर।