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‘चिरागों को न बुझने दें, चलो ऐसा हुनर सीखें...’

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फिरोजाबाद। शिक्षक बाबूराम शर्मा का स्मृति दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन विभव नगर में हरिओम शर्मा के संयोजन में किया गया। सुबह हवन के बाद सुंदरकांड पाठ हुआ। इसमें शिक्षक अशोक चरौरे का तिलक लगाकर सम्मान किया गया। इसके बाद काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसका शुभारंभ अध्यक्ष प्रमोद बाबू दुबे ने किया।
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सर्वप्रथम सरस्वती वंदना की प्रस्तुति प्रवीन कुमार पांडेय ने दी। प्रमोद बाबू दुबे ने बिना तुम्हारे यहां जानकी ऐसे ही दिन बीते..., डा. एबी चौबे ने झरेंगे पीले पत्र, तभी फिर आएगा नव सत्र, आशा कुलश्रेष्ठ ने चिरागों को न बुझने दें, चलो ऐसा हुनर सीखें... ,चंद्रप्रकाश चंद्र ने स्वार्थ के आंगन में मुरख झूमि-झूमि नाचे.., पूरनचंद्र गुप्ता ने राम का नाम बड़ा अभिराम हैं.., डा. सुंदरबीर सिंह ने समय बहुत नाजुक है, साथी हमें दूर रहने दो..., जैसी कविताएं पढ़ीं। अशोक कुमार चनौरे ने अरे मन सुमिर प्रभु का नाम।
डा. रामसेनहीलाल यायावर ने पढ़ा कि जिनकी महिमा कहि वेद थके बृज में, वह धारिके देय मिल्यौ....। संचालन कृष्णकुमार कनक ने किया। हरिओम शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान यज्ञदत्त शर्मा, गुरुदत्त शर्मा, अरुणेश शर्मा, अशोक कुमार शर्मा, राजीव शर्मा, मयंक शर्मा, आशुतोष शर्मा, जितेंद्र शर्मा, विपुल मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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