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पांच ग्रह बदलेंगे घर

Wed, 08 Jul 2015 11:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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फीरोजाबाद। ग्रहों का मानव जीवन पर विशेष प्रभाव है। ये किसी भी दशा में बड़ा उथल-पुथल करने में सक्षम हैं। यदि इनकी चाल और कदमताल जरा भी गड़बड़ा गई तो समझो सब खराब होगा। कुछ ऐसे ही आसार जुलाई माह में नजर आ रहे हैं। जुलाई महीने का आगाज  होते ही ग्रहों की पदचाप से भविष्य पढ़ने वालों के माथे पर बल पड़ने लगा है। इस महीने एक साथ सूर्य,  बुध, बृहस्पति, शुक्र और मंगल अपने घर बदल कर नवगृह में अपने चरण  रखने जा रहे हैं।
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  सौर मंडल में चलायमान ग्रहों को शायद इसका अंदाजा ही नहीं है कि उनकी चाल और कदमताल से इंसानों का हाल कैसे बेहाल होता है। 2015 के जुलाई महीने की तीन तारीख को सुबह 9 बजकर  44 मिनट पर ऐश्वर्य के स्वामी शुक्र देव ने सबसे पहले अपना घर बदला।  शुक्र देव अपने परम मित्र चंद्र की राशि कर्क से निकलकर शत्रु सूर्य की राशि सिंह में प्रविष्ट हुए। मित्र की राशि के आरामदायक प्रवास के बाद दुश्मन के घर का यह पड़ाव निश्चित रूप सुखद संकेत नहीं दे रहा है। यह स्थिति पक्के तौर पर सुख और शांति की कमी दर्शाती है।
बता दें कि 5  जुलाई, रविवार दोपहर 2 बजकर 2 मिनट पर बुध अपने परम मित्र शुक्र की राशि वृष से निकल स्वयंभू की राशि मिथुन में पहुंचे। यहां उनकी अगवानी उनके मित्र सूर्य के साथ शत्रु मंगल ने की। सूर्य और बुध की मुलाकात ने जहां बुद्धदित्य योग बनाया, वहीं मंगल की उपस्थिति ने बुध के आराम में खलल डाला। 14 जुलाई, मंगलवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर देवगुरु  बृहस्पति चंद्र राशि कर्क (जहां वो उच्च के होकर गतिशील व क्रियाशील थे)  त्याग कर सूर्य की राशि सिंह में दाखिल होंगे। वहां उनका स्वागत दैत्यगुरू  शुक्र पुर जोशी के साथ करेंगे। शुक्रवार दिनांक 17 जुलाई को सुबह 3  बजकर 24 मिनट पर सूर्यदेव जब बुध की राशि मिथुन से निकल कर चंद्रमा की  राशि कर्क में अपने चरण रखेंगे तब मिथुन में दो शत्रु बुध और मंगल तन्हा रह  जाएंगे। यह स्थिति बाजार, व्यापार और कारोबार पर बहुत भारी पड़ेगी। वाणी,  वकालत और मार्केटिंग पर असर पड़ेगा। बेमतलब के बयान सुर्खियां  बटोरेंगे वहीं कोई कानूनी मसला भी सर उठा सकता है। वहीं मंगल ग्रह भी 31 जुलाई को अपना स्थान बदल रहा है। वह सुबह 10.29 बजे मिथुन राशि से निकलकर कर्क में प्रवेश करेंगे। लगभग 44  दिन से मंगल का निवास मिथुन में था। इससे भी अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित होगी।
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श्री मंदेश्वरी बिहारी जी मंदिर के महंत पंडित मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि पांच ग्रहों के गृह परिवर्तन से ग्रह योग भी बदल जाएंगे। इस परिवर्तन से शनि देव पर चल रही बृहस्पति की पांचवी दृष्टि खत्म हो जाएगी। मंगल में गतिशील शनि के प्रकोप का नया दौर आरंभ होगा। सोना और प्रॉपर्टी का कारोबार बैक फुट पर चले  जाने का अंदेशा है। वहीं शनि की दशम दृष्टि बृहस्पति को प्रताड़ित करेगी। यह योग विद्या, विवेक और धन के लिए शुभ परिणाम नहीं लाएगा। बाजार में भारी मंदी और धन की कमी व्यापारियों ही नहीं जनमानस को भी बेचैन करेगी। वहीं  देश सहित विश्व में तनाव के हालात पैदा होंगे। विरोध और आंदोलनों के साथ राजनीतिक साजिशें भ्रम फैलाएंगी। जन मानस दुखी रहेगा।
वहीं प. शिवनारायण शास्त्री की माने तो सिंघस्थ होकर यानी सूर्य की राशि में आकर बृहस्पति वैवाहिक बंधन के  महूर्तों पर भी नकारात्मक असर डालेंगे। नयी साजिशें पंख फैलाएगी। नए विवाद  और घोटाले या छद्म घोटाले माहौल खराब करेंगे। सत्ता पक्ष परेशान होगा।  दुर्घटनाओं में इजाफा होगा। प्राकृतिक व मानव जनित आपदाओं की आहट सुनाई दे  रही है। लगता है कि जनता को अच्छे दिनों के लिए कम से कम नए चुनाव का  इंतजार करना पड़ेगा। किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति,  उद्योगपति, अभिनेता या बड़े नेता को कष्ट या उनकी हानि से भी इसे जोड़कर देखा जा सकता है।
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