फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सजा के बाद बोले माता-पिता, बेटी को न्याय तो मिला लेकिन परवरिश कैसे होगी ?

विज्ञापन
विज्ञापन
जसराना। साढे़ तीन माह में बेटी का अदालत से न्याय तो मिल गया लेकिन अब माता-पिता को उसकी परवरिश की चिंता सता रही है। पिता ने कहा बेटी गांव की अन्य बच्चियों के साथ कैसे रहेगी? इस बात की चिंता अब सता रही है। मामले में आरोपी पक्ष कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन

थाना जसराना क्षेत्र के गांव निवासी युवक नीरज ने गांव की दस वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म किया। साढ़े तीन माह में ही न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। 14 दिसबंर 2020 को घटी घटना के बाद एएक अप्रैल को आए फैसले से ग्रामीण खुश है। हालांकि पीड़ित बालिका के माता-पिता के चेहरे पर आज भी चिंता की लकीरें हैं। पिता ने कहा बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले को तो सजा मिल गई लेकिन बेटी की चिंता सता रही है।
आज भी उनकी बेटी चारपाई पर है और उसका उपचार चल रहा है। पिता ने कहा कि पैसों की तंगी के कारण वे बालिका का उपचार भी नहीं करा पा रहे हैं। बेटी के भविष्य की चिंता को लेकर माता-पिता ने रोते हुए कहा कि आखिर वे अपनी बेटी की पढ़ाई लिखाई का खर्चा कैसे उठाएंगे? आरोपी का मकान एवं परिवार भी उनके घर के पास ही रहता है। बेटी के विवाह की भी चिंता माता-पिता के चेहरे पर साफ है। इधर, नीरज को सजा मिलने के बाद उसके भाई ने कहा यदि उसने गुनाह किया है तो उसे सजा मिल गई।
विज्ञापन

बेटी कहती थी चाचा, पिता ने किया था विश्वास
बेटी के पिता ने बताया कि नीरज मेरे से उम्र में कुछ छोटा है। बेटी उसे चाचा कहकर बुलाती थी। गांव के पास ही भंडारे में वह बेटी को लेकर गए थे। कार्यक्रम होने के बाद नीरज ने घर लौटते समय उसकी बेटी को घर छोड़ने को कहा। इस पर उन्होंने कहा छोड़ दो, लेकिन उसके मन में इस तरह का पाप था, वह नहीं जानते थे। बेटी के पिता का कहना है कि फांसी से बढ़कर भी अगर कोई सजा हो तो नीरज को मिलनी चाहिए।
सात भाइयों में चौथे नंबर का था आरोपी
जसराना। नीरज अपने सात भाइयों में चौथे नंबर का है। तीस वर्ष की उम्र होने के बाद उसकी शादी नहीं हुई थी। कभी-कभार मजदूरी करने वाला नीरज गांव में घूमता रहता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें