फिरोजाबाद। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बात चलें तो फिरंगियों के खिलाफ चले आंदोलन में जगन्नाथ लहरी ने युवावस्था में खुद सक्रिय हुए बल्कि युवाओं को जोड़ने का काम किया था। इंटर की पढ़ाई के दौरान आंदोलन के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। पांच वर्ष तक जेल में रहना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस में सक्रिय होने के साथ कई सम्मेलनों में गए। फिरोजाबाद की जनता ने निर्दलीय विधायक चुनकर भेजा था। उनका परिवार के लोग कोटला रोड स्थित लहरी कंपाउंड़ में निवास करते है।
आजादी के आंदोलन के इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वालों में जगन्नाथ लहरी का नाम भी गिना जाता है। ब्रिटिश सरकार का उन्होंने विरोध 1940 में इंटर की पढ़ाई के दौरान किया था। पहली बार सत्याग्रह आंदोलन में जेल गए। सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार करके दोबारा से जेल भेजा गया था। इतना ही नहीं काफी एक्टिव युवा जगन्नाथ लहरी का आजादी के आंदोलन को धार देने के कारण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से उनका सीधा जुड़ाव था।
जगन्नाथ लहरी के भतीजे केशव लहरी ने बताया कि वह उनके पास महात्मा गांधी के पत्र सीधे आते थे। आंदोलन को आगे किस दिशा में ले जाना है इसके दिशा निर्देश मिलते थे। स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पूरा इतिहास उन्होंने खुद लिखा था। इसमें उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने फिरोजाबाद के सभी आंदोलनकारियों का जिक्र किया था। देश के आजाद होने के बाद 1957 में कांग्रेस छोड़कर फिरोजाबाद से निर्दलीय चुनाव लड़े तो फिरोजाबाद की जनता ने उन्हें जिताकर विधानसभा भेजने का काम किया था। कांग्रेस ने सत्ता में आने पर डिप्टी लेबर मिनिस्टर बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन जिद्दी स्वभाव के जगन्नाथ लहरी ने कांग्रेस का प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया था कि जब कांग्रेस में ही नहीं तो मैं मंत्री क्यों बनूं।