रत्नत्रय नसियाजी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि शीतव्रतों का पालन करने वाले व्यक्ति जीवन का विकास करते हैं। हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह इन पांच पापों का त्याग करने वाला व्यक्ति ही भव-भ्रमण से छुटकारा पा सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से होती है और उसकी शोभा उसके आचरण से होती है। अच्छे आचरण से उसके मां-पिता की ओर व्यक्ति का ध्यान जाता है। आचार्यश्री ने कहा जो भी साधक मोक्षमार्ग की साधना में लीन है, उन्हें मोक्ष मार्ग ही मिलता है। इससे पूर्व प्रवचन की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई। मंच संचालन निर्मल जैन ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या श्रद्धालु मौजूद रहे।