टूंडला। रेलयात्री इतने भी आक्रामक हो सकते हैं, ये मैंने कभी नहीं सोचा था। मैंने अपनी 30 वर्ष की नौकरी में ऐसा खौफनाक मंजर नहीं देखा। 130 की स्पीड से दौड़ती ट्रेन के खुले दरवाजे के किनारे पर यात्रियों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा था। ऐसा लग रहा था मैंने कोई अपराध कर दिया है और मुझे मौत की सजा सुनाई जाने वाली है। ये कहना था सुहेलदेव एक्सप्रेस में बंधक बनाए गए टीटीई राजीव रंजन मिश्रा का।
प्रयागराज हैडक्वार्टर के टीटीई से फोन पर हुई बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि ट्रेन के दो कोचों में एसी काम न करने पर यात्रियों का गुस्सा उनके ऊपर ऐसा था मानो उन्होंने ही एसी खराब किए हों। एसी खराब होने की उन्होंने कंट्रोल रूम को जानकारी दे दी थी तथा मैकेनिक कार्य कर रहे थे, फिर भी यात्रियों ने उन्हें घेर लिया तथा जमकर गालियां दी, अभद्रता की गई। कोई खुद को सीबीआई का अफसर तो कोई खुद को पत्रकार बताते हुए धमका रहा था।।
धकियाते हुए कोच के खुले गेट के पास ले गए। यात्रियों के इरादे उन्हें ठीक नहीं लग रहे थे। सोचकर ही मैं सिहर गया। समझ नहीं आ रहा था कि खुद को कैसे बचाऊं और यात्रियों को कैसे समझाऊं। दौड़ती ट्रेन के बीच मेरे हाथ में मोबाइल था। मैं लगातार कॉमर्शियल कंट्रोल टूंडला को पल-पल की अपडेट दे रहा था। वहीं यात्रियों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था। अनहोनी को लेकर परिवार के प्रति चिंताएं बढ़ने लगी थीं। तभी यात्रियों ने मुझे खींचते हुए शौचालय में बंद कर दिया। ट्रेन के टूंडला पहुंचने पर मुझे मुक्त कराया, तब कहीं जाकर मेरी जान में जान आई। उन्होंने बताया कि पूरे मामले से प्रयागराज अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
फोटो-