स्टेशन रोड स्थित ब्लूमिंग बड्स पब्लिक स्कूल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में शहर के कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
साहित्यकार पं. भोजराज चतुर्वेदी, भगवान सहाय दीक्षित, जगदीश पालीवाल, प्रो. योगेन्द्रपाल सिंह ‘साबिर’, डा. कंवर रिजवी, राजेंद्र भारती, रामदास सैनी की स्मृति में ब्लूमिंग बड्स स्कूल में सम्मान एवं कविता उत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि रामहरि यादव ने किया। कवि लाखन सिंह भदौरिया ने कहा ‘सर्प दंशिता पीड़ाओं को कितने जन्म पड़ा लहराना, तब अभाव के नीलकंठ से फूट रहा मद भरा तराना।’ डा. राज कुमार रंजन ने कहा ‘चंदा सा तन लिये, गंगा सा मन लिये। जमुना सी चुनरिया ओढ़ चली सांवरी।’ डा. राकेश मधुकर ने कहा ‘वाह रे भगत सिंह अमर सिंह होके तूने, जन्म से भी मृत्यु को बड़ा बना दिया।’ हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने कहा ‘पुलिस वाले की हरकतें देखकर बेशर्मी को भी शर्म आई। रिश्वत की बात सौ रुपये से चली, और बीड़ी तक आ गयी।’ संयोजक और संचालक प्रशांत उपाध्याय ने कहा ‘उल्टी सी हर एक कहानी, सांसें मांग रही हैं पानी। अपनी तो जल गई जिंदगी पेट की आग बुझाने में।’ वहीं मुकेश मणिकांचन, बदन सिंह मस्ताना, प्रशांत देव मिश्र, अशोक अंचल, राकेश तैनगुरिया, महेश चंद्र मिश्र, डा. विजय निर्मल ने भी काव्यपाठ किया। अध्यक्षता कृपाशंकर शर्मा शूल ने की। इस अवसर पर राज पचौरी, अशोक चतुर्वेदी, सोनम पालीवाल, क्रांति शर्मा आदि मौजूद थे।