फिरोजाबाद। जिले में करीब 20 साल से होम्योपैथी अस्पतालों के लिए जमीन तलाश की जा रही है लेकिन हर बार फाइल किसी न किसी अड़चन में अटक जाती है। जनपद के 8 राजकीय होम्योपैथी अस्पतालों में से 6 अब भी अपने भवन के लिए तरस रहे हैं। कहीं पीएचसी के एक-दो कमरों में अस्पताल चल रहा है तो कहीं सीमित संसाधनों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
अस्पतालों के लिए स्थायी भवन न होने का असर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी पड़ रहा है। वर्षों से जमीन की तलाश चल रही है लेकिन मामला आगे बढ़ने से पहले ही विवाद, आबादी और दूसरी अड़चनों में फंस जाता है। जिले में भगनेर, मुस्तफाबाद, रुचन मानिकपुर, मोहम्मदपुर खेरिया और बाकलपुर समेत छह राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय अपने भवन की सुविधा से वंचित हैं। कुछ स्थानों पर जमीन मिली भी तो वह विवादित निकली। कुछ जगह जमीन आबादी क्षेत्र से बाहर थी।
जिला कार्यालय भी अपने भवन में नहीं
होम्योपैथी विभाग की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला होम्योपैथिक अधिकारी का कार्यालय भी अपने भवन में संचालित नहीं हो रहा है। जिला कार्यालय मेडिकल कॉलेज परिसर में चल रहा है।
दो साल पहले ही चार्ज संभाला है। अस्पतालों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ जमीनें पहले तलाशी गई थीं लेकिन कहीं विवाद था तो कहीं जमीन आबादी से बाहर थी। अब नए सिरे से प्रशासन से जमीन की उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह, जिला होम्योपैथी अधिकारी