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बंदी की मौत का मामला: रिहा हुए साथी ने बताया जेल का काला सच; प्रताड़ना की दास्तां सुन हिल जाएंगे आप

Wed, 26 Jun 2024 11:25 AM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

सुहागनगरी में जेल में बंदी की मौत के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिहा हुए साथी ने जेल का काला सच बताया। प्रताड़ना की दास्तां सुन आप भी हिल जाएंगे।
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सुहाग नगर पुलिस चौकी पर आप बीती बताता शिवम - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जेल में बंदी आकाश की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह खुलासा उसी के साथ जेल गए शिवम ने किया है। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने आंखों देखी बताई। उसने बताया कि आकाश जेल में बहुत परेशान था। मरने से एक दिन पहले वह रो रहा था। कह रहा था कि मैं उसे अपनी बैरक में बुला लूं। 

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आकाश कह रहा था कि जेल का नंबरदार भिलाड़ी उर्फ दद्दू उसे बेरहमी से पीटता है। बताया कि आकाश व उसको पुलिस ने नहीं पीटा था। जेल में रिहाई से पहले जेल प्रशासन ने खाली कागज पर अंगूठा लगवा लिया। इसके साथ ही एक वीडियो बनाई। इसमें जबरन यह कहने को बाध्य किया कि उसे पुलिस ने थाने व चौकी में पीटा था।

मामला दक्षिण थाना क्षेत्र के नगला पचिया गांव का है। गांव निवासी आकाश और शिवम उर्फ शिवू उर्फ भोलू को पुलिस ने 19 जून को मेडिकल के बाद कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। 21 जून की सुबह जेल में आकाश की मौत हो गई। मामले में काफी बवाल हुआ। मामले में पुलिस व जेल प्रशासन एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। 

सोमवार की शाम आकाश के साथ जेल गए शिवम की भी जमानत हो गई। जमानत के बाद उसने जेल प्रशासन व जेल में बंद नंबरदार पर संगीन आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि थाना पुलिस ने बाइक चोरी के आरोप में 18 जून को उन दोनों को पकड़ा था। रात भर थाने में मुंशी के पीछे उन्हें बैठाए रखा। 

19 जून की सुबह हवालात में बंद कर दिया। इसमें उन दोनों के अलावा तीन अन्य लोग थे। 19 जून को ही उन दोनों को जेल भेज दिया गया। वहां दोनों की तलाशी ली गई। जेल में पूछताछ करने वाले को आकाश ने अपनी उम्र 28 बताई। उसे बैरक नंबर 14 में भेज दिया गया। जबकि, उसने अपनी उम्र 17 साल बताई तो उसे बच्चा वाली बैरक में भेजा गया। 

शिवम ने बताया कि 20 जून की सुबह उसे डॉक्टरी कराने भेजा गया। वहां आकाश पहले से था। वह रो रहा था। बार-बार कह रहा था कि मुझे अपनी बैरक में बुला लो। नंबरदार दद्दू मुझे बहुत मारता है। उससे पैसे की मांग की जा रही है। जबरन काम करने के लिए कहता है। डॉक्टरी कराने के बाद वह गेट के पास जांच कराने पहुंचा। वहां भी वह बैरक बदलवाने की बात कह रहा था। 

बताया कि उसकी जेल में नंबरदार द्वारा ही पिटाई की गई थी। इसमें उसे चोट आई थीं। बताया कि रिहाई से पहले जिला जेल में उसका जबरन वीडियो बनाया गया। इसमें उससे कहलवाया गया कि बाहर जाकर बोलना है कि आकाश के साथ थाने और पुलिस चौकी में मारपीट की गई। एक कोरे सफेद कागज पर उसके हस्ताक्षर भी करवा लिए।

पुलिस के मेडिकल में नहीं थी कोई चोट

बताया कि 19 जून को जेल भेजने से पहले थाना पुलिस ने सुबह करीब पौने दस बजे दोनों का सरकारी ट्रामा सेंटर में मेडिकल कराया था। उस समय हम दोनों को कोई भी चोट नहीं थी। इसके बाद हमें कोर्ट ले जाया गया। जहां हमसे कुछ पूछताछ की गई। फिर जेल में छोड़ दिया गया। वहां तलाशी के दौरान उम्र के हिसाब से बैरक में रखा गया। दूसरे दिन मेडिकल कराने के दौरान आकाश से मुलाकात होने पर सच्चाई पता चली।

बताया कि वह और आकाश 18 जून को बाइक से जा रहे थे। रास्ते में बाइक का इंजन कटा हुआ मिला। उसे उन्होंने बोरी में डाल लिया था। कुछ दूर चलकर उनकी बाइक की चेन टूट गई। उसी समय चार लोग वहां आ गए। बोरी को खुलवाकर देखने लगे। इस पर उन्होंने कहा था कि बाइक का इंजन है। उन्होंने चोरी का आरोप लगाकर पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने माल बरामदी के साथ उन्हें जेल भेज दिया।
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बताया कि आकाश की मौत के बाद जेल प्रशासन ने उसकी सुविधाएं बढ़ा दी। बच्चा जेल में जहां पर वह था, वहां पर पंखा नहीं लगा था। लेकिन, तत्काल पंखा लगा दिया गया। वह तंबाकू का शौकीन है। जेल में तंबाकू प्रतिबंधित है। लेकिन, उसके बाद भी नंबरदार ने उसके लिए खुद तंबाकू की व्यवस्था की। बिस्तर भी साफ सुथरा दिया गया।
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