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Firozabad News: 76 स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन लाइन, जोखिम में पढ़ते हैं 8 हजार बच्चे

Fri, 08 Mar 2024 11:57 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। कायाकल्प से सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने का दावा किया जा रहा है। जर्जर बिल्डिंग वाले स्कूलों का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन अभी भी जिले के 76 स्कूलों में 8 हजार बच्चों की जान का खतरा बरकरार है। इन स्कूलों की छत या परिसर के ऊपर से होकर बिजली के हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। इन तारों का करंट स्कूल में कब दौड़ जाए और इसकी चपेट में कब कौन आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है।प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हाईटेंशन तारों से स्कूलों में कई हादसे हो चुके हैं। इसके बाद भी जिले में विद्युत निगम गंभीर नहीं है। हर साल स्कूलों के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तारों को हटाने के आदेश आते हैं। विभाग 76 स्कूलों को चिह्नित भी कर चुका है। तेज हवा चलने पर स्पार्किंग के दौरान शिक्षक तथा छात्र दहशत में रहते हैं। कुछ स्थानों पर तो बिजली के तार विद्यालय परिसर में लगे पीपल के पेड़ के ऊपर से गुजरे हैं। इससे पेड़ की टहनियां तथा पत्ते हमेशा विद्युत तार से टकराते रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्राथमिक विद्यालय दशकों पुराने हैं, लेकिन बिजली के तार को हटाया नहीं जा सका है।
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शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों की सूची बनाकर विद्युत निगम को देते हुए स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन हटवाने को कहा था। इसके बाद विद्युत निगम ने तार को हटाने में आने वाले खर्च का स्टीमेट बनाना शुरू कर दिया है।



केजीबी पर रहता है खतरा
दबरई स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन तार होकर गुजर रहे हैं। यह आवासीय विद्यालय हैं। 24 घंटे बालिकाएं इन विद्यालय में रहती हैं। हाईटेंशन तार के नीचे ही खेल गतिविधियों के साथ प्रार्थना सभा होती है। हमेशा इन बालिकाओं पर खतरा मंडराता रहता है।
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कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है

गर्मी और बारिश के बाद आंधी आने पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार विद्यालय प्रबंध समिति से लेकर स्थानीय अभिभावकों द्वारा भी शिकायत की गई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि छोटे-छोटे बच्चों को जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।



-जिन स्कूलों से हाईटेंंशन तार गुजर रहे हैं, ऐसे 76 स्कूलों काे चिह्नित किया गया है। इन तारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमने विद्युत निगम को विद्यालयों की सूची सौंप दी है। इसका स्टीमेट बनाकर विद्युत निगम हमें देगा।
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आशीष पांडेय, बीएसए
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