अखिल भारतीय सोहम महामंडल के तत्वावधान में चल रहे विराट संत सम्मेलन में संतों ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
सोहम पीठाधीश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि समय बहुमूल्य है। उसका सदुपयोग करना चाहिए। जो समय बीत जाता है, वह कभी वापस नहीं आता। केवल पश्चाताप ही करना पड़ता है। जीवन में तीन अवस्थाएं हैं, बाल्यावस्था, युवावस्था तथा वृद्धावस्था। बाल्यावस्था विद्यार्जन व शक्ति अर्जन के लिए है। युवावस्था सेवा एवं धनार्जन के लिए तथा वृद्धावस्था परमार्थ चिंतन व अनुभव वाली होती है। स्वामी ज्ञानानंद ने सुमति की सुंदर व्याख्या की। स्वामी सत्यानंद ने कहा कि हमें अपने आपमें स्थित होना चाहिए। भले ही संसार का कोई भी कार्य करें। कथा व्यास पं. रामगोपाल शास्त्री ने सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को मित्रता निभाने की प्रेरणा दी। विराट संत सम्मेलन आज सुबह नौ बजे गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। भागवत कथा के समापन के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।