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हीटर की हीट से नवजात की मौत

Fri, 02 Jan 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
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गुरुवार रात नवजात को उपचार और ठंड से राहत देने के नाम पर रूम हीटर के सामने रख दिया। शांति नर्सिंग होम की ये लापरवाही बच्चे की जान पर भारी पड़ गई और डीप बर्न से उसकी मौत हो गई। परिवारीजनों ने अस्पताल पर हंगामा किया, बाद में बच्चे के पिता सुनील ने थाना उत्तर पर नर्सिंग होम के चिकित्सक और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। घटना के पीछे जिला महिला अस्पताल की लापरवाही भी सामने आई है। बच्चे का जन्म तो यहां कराया गया, लेकिन उसके बाद सभी सुविधाएं होते हुए भी बच्चे को निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
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 मक्खनपुर थाना क्षेत्र के गांव नगला तुर्किया निवासी सुनील जाटव की पत्नी कुसुमा देवी ने बुधवार रात जिला महिला अस्पताल में इस बच्चे को जन्म दिय। सात माह का गर्भ होने के कारण ये काफी कमजोर था। प्रसव कराने वाली महिला चिकित्सक ने उसे प्राइवेट अस्पताल ले जाने को कहा। डाक्टर की सलाह पर सुनील ने बच्चे को आर्य नगर स्थित शांति नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। सुनील ने बताया कि गुरुवार रात करीब दस बजे नर्सिंग होम के कर्मचारी बच्चे को गर्मी देने के लिए घरेलू हीटर के पास ले जाकर तपाने लगे। ओवर हीट से बच्चा झुलस गया और उसकी मौत हो गई। रात करीब एक बजे हंगामे की सूचना पर थाना उत्तर पुलिस मौके पर पहुंची। प्रभारी निरीक्षक थाना उत्तर का कहना है कि मामला दर्ज कर आरोपी चिकित्सक और नर्सिंग होम के स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीप बर्न के कारण हुई मौत


जिला अस्पताल में ईएमओ डा. आलोक का कहना है कि रात करीब दो बजे पुलिस शिशु का शव लेकर आई थी। शिशु की मौत डीप बर्न (ओवरहीट) के कारण हुई है। इसके पीछे नर्सिंग होम के स्टाफ को अनुभव और जानकारी नहीं होना कारण है।
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98 फीसदी नहीं बचते ऐसे शिशु
डा. आलोक का कहना है समय से पूर्व जन्म लेने वाले 98 फीसदी शिशुओं के बचने की उम्मीद कम होती है। दो फीसदी शिशु उस स्थिति में बच पाते हैं, जब समय रहते  उनको बेहतर उपचार मिल जाता हैं। इसके लिए अनुभवी चिकित्सक का होना बेहद आवश्यक होता है।
रेफर क्यों किया, जांच होगी
जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं को बेहतर उपचार देने के लिए आरसीएच वार्ड है। उसमें लगभग सभी आवश्यक मशीनें भी है। अनुभवी चिकित्सकों की तैनाती है। सवाल है कि इसके बाद भी नवजात को प्राइवेट नर्सिंग होम क्यों भेजा गया। सीएमएस डा. अजय शुक्ला ने रेफर किए जाने के मामले की जांच कर कार्रवाई कराने की बात कही है।
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